Saturday, 16 July 2016

संघर्ष की कहानी रितु रानी


जब आप बतौर कप्तान अपनी टीम को एक नए मुकाम पर ले जाते हों और उस मुकाम को सही दिशा देने की बारी आए तब आपकी कप्तानी छिन ली जाए, इससे बड़ी नाइंसाफी क्या हो सकती है। यही अन्याय भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान रहीं रितु रानी के साथ हुआ है। दरअसल, रितु रानी को रियो ओलंपिक टीम से बाहर कर दिया गया है।  रितु 2011 से भारतीय टीम की कमान संभाल रही थीं और उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि ये रही कि उन्हीं के नेतृत्व में महिला टीम ने 36 साल बाद ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया लेकिन अब अनुशासनहीनता और उनके फॉर्म को कारण बताकर टीम से बाहर कर दिया गया है।
रितु का आरोप है कि उनके साथ बेवजह ऐसा किया गया और वह राजनीति का शिकार हुई हैं। बहरहाल,  पीछे की कहानी क्या है, इस बारे में कुछ कह पाना बहुत मुमकिन नहीं है। वैसे ये भी दिलचस्प है कि करीब दो महीने पहले ही हॉकी इंडिया की ओर से रितु को 'अजीत पाल सिंह मिडफिल्डर अवॉर्ड' से नवाजा गया। साथ ही अर्जुन अवार्ड के लिए उनका नाम भेजा गया । यही नहीं कुछ ही दिन पहले जब पीएम नरेंद्र मोदी ओलंपिक में हिस्सा लेने वाले खिलाड़ियों से मिले तो उसमें भी रितु शामिल थीं और फिर अचानक इस फैसले ने लोगों को हैरान कर दिया है। सोशल मीडिया पर भी रितु के समर्थन में एक अभियान चल रहा है।  29 दिसंबर 1991 को हरियाणा में जन्मी रितु रानी ने अपनी पढ़ाई श्री गुरु नानक देव सीनियर हाइयर सकेंड्री स्कूल से की थी। महज 12 साल की उम्र में रितु ने शाहाबाद मारकंडा के शाहबाद हॉकी अकादमी में हॉकी के गुर सिखकर भारतीय महिला हॉकी के लिए इतिहास लिखने के लिए अपनी शुरुआत का आगाज किया था।  14 साल की उम्र में हॉकी की यह दिग्गज खिलाड़ी भारत की सीनियर टीम में शामिल हो गई थीं और साथ ही 2006 मैड्रिड में हुए वर्ल्ड कप में सबसे युवा खिलाड़ी के रूप में टीम का हिस्सा थीं। इसके बाद रितु रानी ने कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा और 2009 में रूस में आयोजित चैंपियन चैलेंजर्स में भारत के लिए सबसे ज्यादा गोल जमाने वाली खिलाड़ी के तौर पर उभरी थीं। रितु रानी के इस बेहतरीन परफॉर्मेंस का ही कारण था कि भारत की महिला टीम ने चैंपियन चैंलेंजर्स का खिताब अपने नाम कर लिया था। वह अद्भूत प्रतिभा के कारण साल 2011 में भारतीय महिला टीम की कप्तान बनीं। रितु रानी के नेतृत्व में भारत की महिला टीम ने कई रिकॉर्ड अपने नाम िकए ।  2013 में कुआलालम्पुर में हुए एशिया कप में ब्रांज मेडल सहित 2014, इंचियोन में एशियन गेम्स में ब्रांज मेडल हासिल कर भारत की टीम ने भारतीय महिला हॉकी को भारतीय प्रशंसकों के दिल में जगह बनाने में कामयाब रही थीं। पांच फुट दो इंच लंबी रितु रानी के करियर में सबसे एतिहासिक समय तब आया जब उनकी कप्तानी में भारतीय महिला टीम ने लगभग 36 साल बाद ओलंपिक में शामिल हुई है जो इस हॉकी खिलाड़ी के योगदान को अमर कर जाता है। रितु रानी ने अब तक 213 मैच भारतीय महिला टीम के लिए खेल चुकी हैं




हर्ष को बनाया हमसफर
इसी एक जुलाई को पटियाला के पंजाबी गायक हर्ष शर्मा उर्फ हैश से रितु रानी ने सगाई की थी। दोनों ने ओलिंपिक के बाद शादी करने का फैसला किया है। हर्ष शर्मा पटियाला के रहने वाले हैं। उनकी मां पूनम बाला पटियाला में एनआईएस (स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया) में हॉकी कोच हैं। रितु 2014 तक रेलवे की खेल कोटे से रेलवे की कर्मचारी रहीं और 2014 में उन्होंने हरियाणा पुलिस ज्वाइन किया।

Thursday, 14 July 2016

पोर्न से ज्यादा खोजा गया ‘पोकेमॉन गो’


क्रैश हुए गूगल के सर्वर, टूट रहे रिश्ते

सिर्फ तीन देशों में रिलीज हुआ मोबाइल गेम ‘पोकेमॉन गो’ गूगल पर सबसे ज्यादा खोजी जानी वाली सामग्री बन गया है। लोगों में गेम की ऐसी दीवानगी है कि पोर्न वीडियो भी पोकेमॉन से कम सर्च हो रहा है। गूगल की मूल कंपनी का वह हिस्सा जो इस खेल के लिए सर्वर उपलब्ध करा रहा है, लगातार क्रैश हो रहा है। कई और दिलचस्प वाकये भी ‘पोकेमॉन गो’ के बहाने सामने आए हैं।

जिस आयु वर्ग में सबसे लोकप्रिय, वही तो देखता है पोर्न
‘पोकेमॉन गो’ 18 से 24 साल के लोगों के बीच सबसे ज्यादा लोकप्रिय हुआ है। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में इस उम्र के लोग या कहें युवा पोर्न की गिरफ्त में हैं। लेकिन ‘पोकेमॉन गो’ ने बीते एक हफ्ते में सब बदलकर रख दिया है। गूगल ट्रेंड की मानें तो पिछले कुछ दिनों में ‘पोकेमॉन गो’ इतना ज्यादा सर्च किया गया कि इसने पोर्न वीडियो को कहीं पीछे छोड़ दिया है। ऐसा पहली बार है कि जब युवा पोर्नोग्राफी से ज्यादा एक मोबाइल गेम ढूंढ रहे हैं।

1990 में हुआ था जन्म, आज हर घर का हिस्सा है पोकेमॉन
जापानी कंपनी निन्टेंडो ने 1990 में पहली बार पोकेमॉन गेम लॉन्च किया था। हालांकि गेम को कामयाबी तब मिली जब इसने कार्ड के रूप में स्कूलों का रुख किया। तब कार्ड को आपस में बदलकर इसे खेला जाता है। इसके बाद टीवी पर पोकेमॉन की कार्टून सीरीज आई, जिसने बच्चों के बीच अपनी पैठ बनाई। 26 साल में पहली बार ऐसा हुआ है कि पोकेमॉन को स्मार्टफोन गेम के रूप में बाजार में उतारा गया है।

दो से तीन दिन में आएगा भारत में
अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में ऐप स्टोर और गूगल प्ले स्टोर से गेम मुफ्त में डाउनलोड किया जा सकता है। भारतीय उपभोक्ताओं को अभी इसके लिए इंतजार करना होगा। लेकिन ऐसी खबरें हैं कि अगले दो से तीन दिन में यह ऐप की शक्ल में यह गेम भारत में भी लॉन्च हो जाएगा।


ऐसे खेलिये
पोकेमॉन शब्द का पूरा अर्थ पॉकेट मॉन्स्टर (राक्षस) है। इस मोबाइल फोन गेम में लोग वर्चुअल दुनिया के ट्रेनर बनकर अलग-अलग शक्लों में मौजूद कई शैतानों को पकड़ते हैं, और फिर उन्हें एक-दूसरे से लड़ाते हैं। इसी आधार पर गेम में उनके ग्रेड और अंक बढ़ते हैं। पोकेमॉन गो पहले से चल रही पोकेमॉन सीरीज़ का नया गेम है, जिसे इस बार एंड्रायड और आईओएस डिवाइस में भी इंस्टाल किया जा सकता है। पोकेमॉन गो में आभासी दुनिया और असली दुनिया को मिला दिया गया है, जिससे खेल का रोमांच बढ़ जाता है। इस खेल से जुड़ा ऐप जीपीएस के जरिये आपकी लोकेशन और आपके फोन की घड़ी के आधार पर तय करता है कि कौन-सा पोकेमॉन आपके सामने आएगा। अगर आप घास के आसपास हैं तो कीड़े - मकोड़े जैसा, और अगर पानी के पास हैं जलजीवों जैसे पोकेमॉन पकड़ने होते हैं।

और प्रेमिका ने कहा, किसी एक को चुनना होगा
पोकेमॉन गो गेम की युवाओं को ऐसी लत लगी है कि रिश्ते टूटने की खबरें भी सामने आ रही हैं। अमेरिका की रहने वाली जूलिया वाकर ने अपने प्रेमी के लिए पोकेमॉन का पिकाचू गेम खरीदा, लेकिन वह उसका आदी हो गया। वहीं लिएन नाम के एक यूजर ने अपना ट्वीट शेयर करते हुए बताया कि उसकी प्रेमिका ने पोकेमॉन या उसमें से किसी एक को चुनने के लिए कहा है।

Saturday, 2 July 2016

‘मौत की सेल्फी’ लेने का शौक क्यों?



कभी सेल्फी शौक हुआ करती थी। दायरा बढ़ा तो जुनून बनी और अब दुनियाभर में लोगों का पागलपन बनती जा रही है। जोखिम भरी जगहों पर एक क्लिक के जरिए हजारों लाइक्स की उम्मीद में युवा मौत के मुंह में समा रहे हैं। कानपुर में बीते दिनों सात बच्चे गंगा में डूबकर मर गए इसी सेल्फी के चक्कर में। कम से कम आप तो बचकर ही रहना।

सबसे आगे हम
- 49 मौतें हुईं साल 2014 में सेल्फी लेने के चक्कर में दुनियाभर में। सबसे ज्यादा 19 मौतें भारत में।
- 27 मौतें हुईं साल 2015 में सेल्फी के चक्कर में पूरी दुनिया में। इसमें आधी मौतें भारत में ही हुईं।
- भारत के अलावा अमेरिका और कनाडा क्रमश: दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं सेल्फी से हुई मौतों के मामले में।

युवा ही हैं चपेट में
- 21 साल है औसत उम्र सेल्फी लेने के चक्कर जान गंवाने वालों की। इसमें भी 75 फीसदी पुरुष थे।

मोबाइल से लगाव
27 सेकंड भी दूर नहीं रह पाते पुुरुष अपने मोबाइल से, महिलाएं 57 सेकंड की दूरी ही झेल पाती हैं।

ऐसा है नशा
10 लाख से ज्यादा सेल्फी ली जाती हैं दुनियाभर में 18 से 24 साल के युवाओं के बीच रोजाना।
05 करोड़ 84 लाख से ज्यादा तस्वीरें इंस्टाग्राम पर अपलोड हो चुकी हैं हैशटेग सेल्फी के साथ।
50 फीसदी कॉलेज पढ़ने वाले छात्र और 77 फीसदी छात्राएं अपनी सेल्फी स्नैपचैट पर अपलोड करते हैं।

हादसे या लापरवाही
- महाराष्ट्र के नागपुर की एक झील में सेल्फी लेने के बाद आधा दर्जन छात्र नदी में डूबे।
- ताजमहल के सामने जापानी पर्यटक सेल्फी लेने के दौरान सीढ़ियों पर फिसलकर घायल हुआ, बाद में मौत।
- अमेरिका के कैलिफोर्निया में बंदूक के साथ सेल्फी लेती महिला से दबा ट्रिगर, मौके पर मौत।
- बुल्गारिया में बुल रन के दौरान सांडों के साथ सेल्फी लेने की कोशिश में गई युवक की जान।

कोशिश
मुंबई पुलिस ने शहर भर में एक दर्जन से ज्यादा जगहों को नो सेल्फी जोन घोषित कर दिया है।

13 सितंबर 2002 को पहली बार ऑस्ट्रेलियाई इंटरनेट फोरम में सेल्फी शब्द का उपयोग हुआ था।
सेल्फी के साथ अब वेल्फी शब्द भी लोकप्रिय हो रहा है। इसमें फोटो की जगह वीडियो रिकॉर्ड किया जाता है।
सेल्फी खींचने के लिए बाजार में सेल्फी स्टिक भी मौजूद हैं। एंड्रायड उपभोक्ताओं के लिए ब्लूटूथ सेल्फी स्टिक भी आ गई है।

सावधान, आगे अफवाह है....

 जिस सोशल मीडिया को वर्तमान में अपनी बात रखने का बेहतरीन प्लेटफॉर्म माना जा रहा है वहां अफवाह और झूठ का साम्राज्य भी कायम हो रहा है। इस ‘अफवाह संसार’ में आम आदमी ही नहीं जाने-अनजाने में सितारे भी शरीक होने लगे हैं। 


अगर यह सवाल किया जाए कि सोशल मीडिया पर किसी सूचना या पोस्ट को लाइक या शेयर करने से पहले आप कितनी बार क्रॉस चेक करते हैं ? निश्चित ही आपका जवाब नहीं में होगा। सोचिए, अगर किसी वायरल झूठ को कोई सेलेब्रिटी सच समझकर शेयर कर दे तो क्या हो? ऐसा ही कुछ हुआ स्नूकर और बिलियर्ड्स के वर्ल्ड चैंपियन भारत के पंकज आडवाणी के साथ। दरअसल, सोशल मीडिया पर हाल ही में एक मैसेज वायरल हुआ था, जिसमें कहा गया कि यूनेस्को द्वारा पीएम मोदी को बेस्ट पीएम घोषित किया गया है। हकीकत में यूनेस्को ने ऐसा कुछ नहीं किया है लेकिन इसकी सच्चाई जाने बगैर पंकज आडवाणी ने इस मैसेज के आधार पर पीएम मोदी को बधाई देते हुए ट्वीट कर दिया। फिर क्या था, जैसे ही साइबर संसार के धुरंधरों को पता चला उन्होंने आडवाणी का जमकर मजाक उड़ाया। हालांकि आमतौर पर कैमरे से दूर रहने वाले पंकज ने बाद में सफाई भी दे दी लेकिन तब तक उनकी फजीहत हो चुकी थी। कुछ माह पहले  एक पैरोडी अकाउंट से किए गए ट्वीट को लेकर दिल्ली के पुलिस प्रमुख बी एस बस्सी को भी शर्मिंदगी झेलनी पड़ी थी। बस्सी ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और एक टीवी पत्रकार पर निशाना साधा था। टीवी पत्रकार के पैरोडी ट्वीट में खुद पर लगाए गए आरोप से चिढ़े बस्सी ने केजरीवाल और पत्रकार को ‘खुद का गुणगान’ करने वाला कहा जबकि उन्होंने इस तथ्य पर गौर ही नहीं किया कि ऑनलाइन गाली-गलौज की प्रवृति के कारण पत्रकार ने काफी दिनों से ट्विटर का इस्तेमाल बंद कर रखा है। बस्सी जब तक ट्वीट डिलीट करते वह ट्रॉल किए जा चुके थे।  पैरोडी ट्वीट करने वाले शख्स से शीर्ष पुलिस अधिकारी का चकमा खा जाना मामूली बात नहीं थी। दरअसल, अराजकता सोशल मीडिया की पहचान बनती जा रही है और यहां सूचना और अफवाह में अंतर मिट जाता है। गलत सूचनाएं वायरल होने से  ही मुजफ्फरनगर और असम जैसे दंगे हुए। आए दिन इस संसार में ट्रेजडी किंग दिलीप कुमार, शशि कपूर और कादर खान जैसे सितारों को जिंदा रहते ही श्रद्धांजलि दे दी जाती है। साइबर दनिया में पैरोडी अकांउट और फोटोशॉप का लगातार दबदबा बढ़ता जा रहा है और 'अंध यूजर' बेधड़क बिना किसी जांच परख के उसे 'लाइक', 'शेयर'या 'रीट्वीट' करने को तैयार बैठे रहते हैं। फोटोशॉप के जरिए तो झूठ-फरेब फैलाने का खेल हर दिन खेला जा रहा है। हो सकता है, कुछ युवा मसखरी में ऐसा करते हों लेकिन सेलिब्रेटी और संस्थान भी इसका हिस्सा बन जाते हैं। बीते साल की बात है, सोशल मीडिया पर फिल्मकार अमुराग कश्यप ने एक फिरकी ली । उन्होंने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर अपनी एक आंख पर चोट लगी तस्वीर शेयर की थी। उन्होंने लिखा कि यह मिक्सड मार्शल आर्ट्स लड़ाके से झड़प की देन है। जाहिर है इस तस्वीर को वायरल होना था। इसके बाद सामने आए कश्यप ने खुद इस तस्वीर को फर्जी बता दिया। उन्होंने कहा कि यह एक बनावटी इम्तिहान था। इस पर खबर बनाने वाले पत्रकार और समाचार संस्थाओं को झेंपना पड़ा। कश्यप ने कहा कि उन्होंने शर्त लगाई थी कि यह तस्वीर बिना क्रॉस चेक के खबर बन जाएगी, यकीनन वह जीत गए।  इसी तरह 2015 में जब चेन्नई में लगातार बारिश के बाद बाढ़ आई तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वहां का हवाई दौरा किया। उसी दिन प्रेस इनफॉर्मेशन ब्यूरो ने प्रधानमंत्री मोदी की एक तस्वीर ट्वीट पर शेयर की, जिसमें वे हेलिकॉप्टर में बैठे हैं और खिड़की से बाढ़ग्रस्त चेन्नई का जायजा ले रहे हैं। कुछ देर बाद इस फोटो को फर्जी बताया गया। असली तस्वीर में हेलिकॉप्टर की खिड़की के बाहर हर ओर पानी और पेड़ वगैरह दिख रहे थे, जबकि पीआईबी की फोटो में फोटोशॉप की मदद से शहर के हालात को स्पष्ट दिखाने के लिए खिड़की से बाहर पानी में डूबे मकानों की एक तस्वीर पेस्ट कर दी गई। ट्विटर पर खूब खिल्ली उड़ाए जाने के बाद पीआईबी ने यह फोटो डिलीट कर दी। कुछ ऐसा ही दिल्ली सरकार की आॅड-इवेन योजना के बारे में भी 2009 की एक तस्वीर प्रसारित करके दिखाया गया कि कैसे यह योजना फेल हो गई है। ऐसा ही कुछ लातूर में पानी की रेल चलाई गई तो कहा गया कि भारत में पहली बार पानी की रेल चली है। इस पर एक अंग्रेजी अखबार ने खबर छापी कि 2 मई, 1986 को भारत में पहली बार गुजरात के राजकोट में पानी की रेल चली थी। राजस्थान में पिछले 14 साल से पानी सप्लाई के लिए रेलवे की सेवा ली जा रही है। ये उदाहरण बताने के लिए काफी हैं कि ऑनलाइन अफवाह का दबदबा बढ़ता जा रहा है। यह भी सच है कि सोशल मीडिया से मिल रही चुनौतियों से निपटने के लिए भारत तैयार नहीं है। भारत की सरकार के लिए साइबर सिक्योरिटी अभी तक प्राथमिकता का विषय नहीं है इसलिए ना तो ध्यान दिया जाता है, ना ही इसे लेकर कोई राष्ट्रीय नीति है। भारत के पास बजट तो है लेकिन इसे कैसे खर्च किया जाए इसका अधिकारियों को पता नहीं है। लेकिन ब्रिटेन इसको लेकर चेत चुका है। ब्रिटिश सरकार की ओर से  अगस्त 2011 में लंदन में हुए दंगे में सोशल मीडिया की भूमिका पर एक समिति भी बनाई गई। इस समिति ने ‘आफ्टर द रायट्स’ नाम से रिपोर्ट पेश की। समिति ने सोशल मीडिया पर अफवाह पर मुख्यधारा के मीडिया और सेलिब्रेटियों के विश्वास करने को गंभीर माना।   




अफवाह 
सीमा पर तिरंगा फहराते जवान
हाल ही में फर्जी पोस्ट्स में शुमार होने वाली तस्वीर सीमा पर तिरंगा फहराते जवानों की थी। देशभर के सेंट्रल यूनिवर्सिटीज में तिरंगा फहराए जाने के एलान के बाद समाचार चैनलों पर बहस के दौरान बीजेपी प्रवक्ता ने इसका हवाला दिया था। उन्होंने कहा था कि भारतीय सैनिक मरते दम तक सीमा पर तिरंगा फहराने की कोशिश कर रहे हैं। जबकि हकीकत यह थी कि तस्वीर फर्जी थी और फोटोशॉप के जरिए बनाई गई थी। पुलित्जर अवार्ड से सम्मानित हो चुकी यह तस्वीर आइवोजीमा में झंडा फहराते जवान की थी।

नासा से भारतीय लड़की को न्यौता
बीते दिनों सोशल मीडिया के सभी मंचों पर पश्चिम बंगाल की एक 18 साल की लड़की शतपर्णा मुखर्जी को लेकर गर्व करने लायक खबर फैल रही थी। इसमें बताया गया था कि अंतरिक्ष अनुसंधान में सबसे काम को अंजाम देने वाली वैज्ञानिक संस्था नासा ने लड़की को अपने साथ इंटर्नशिप की पेशकश की है। जल्द ही यह खबर फर्जी साबित हो गई। नासा ने साफ किया कि उनके पास इस बात का कोई रिकॉर्ड नहीं है कि इस नाम के किसी को इंटर्नशिप, स्कॉलरशिप या किसी भी तरह की अकादमिक या आर्थिक मदद की पेशकश की गई है।द्

धोनी की बेटी की पहली झलक
बीते साल भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की बेटी जीवा की पहली झलक वाला वीडियो पिछले दिनों सोशल मीडिया पर सुर्खियां बटोर रहा था। एक तस्वीर में भी धोनी को जीवा के साथ दिखाया गया था। मगर, यह सच नहीं था। जीवा की मां साक्षी धोनी ने तस्वीर और वीडियो को फर्जी बताया। बाद के दिनों में जीवा को देखने वाले सबने यकीन किया कि उस तस्वीर और वीडियो में दिखाई गई नन्ही बच्ची जीवा नहीं थी।

एमएच-17 को बम से गिराने का वीडियो
बीते दिनों लोगों का ध्यान खींच रहा हवाई जंग का वीडियो फर्जी साबित हो गया। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दिखाया गया था कि जुलाई 2014 में मलेशिया एयरलाइंस के एमएच-17 विमान को रूसी रुझान वाले आतंकियों ने मिसाइल मारकर गिरा दिया था। बाद में यह फुटेज नकली साबित हो गया।

जिसको खाने से होती है मौत
आपको जागरूक करने के नाम पर सॉफ्ट ड्रिंक, आलू चिप्स, कैंडिज को मौत का सामान बताया जाता है। कई सालों से चल रहे ऐसे पोस्टस के पीछे कोई खास रिसर्च या सबूत नहीं होते। यह सिर्फ हवाई चेतावनी के सहारे फैला दिया जाता है और किसी का भला नहीं करता। हाल ही में टॉफी पल्स कैंडीज को लेकर ऐसे पोस्ट्स वायरल हुए थे. इनका कोई आधार नहीं था, लेकिन इसने लाइक, शेयर और कमेंट्स को खूब आकर्षित किया।


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जो सरकार ने किया

844 सोशल मीडिया पेज ब्लॉक किए गए सरकार द्वारा जनवरी से नवंबर, 2015 के बीच।
492 पेज इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट, 2000 के सेक्शन 69ए के तहत ब्लॉक किए गए।
4,192 मामले सेक्शन 66ए के तहत दर्ज किए गये देश भर में पिछले साल।
15,155 फेसबुक के कंटेंट को प्रतिबंधित किया गया सरकार के द्वारा इस वर्ष जून तक
352 साइट लिंक प्रतिबंधित किए गए 2015 के नवंबर महीने तक।
19 फीसदी है भारत में इंटरनेट की पहुंच भारत में जो कि इस श्रेणी में दुनिया की तीसरी सबसे संख्या है।

 




तुक्का या इक्का - तुषार कपूर

बॉलीवुड में जब एक अभिनेता अपने पुत्र को भी सिनेमा जगत में लाता है तो दर्शकों को आशा होती है कि उसका बेटा भी पिता की तरह बेहतरीन अभिनय से उनका मनोरंजन करेगा लेकिन सत्तर के दशक के सुपरस्टार जितेंद्र के बेटे तुषार कपूर के साथ ऐसा कुछ नहीं हुआ। तुषार ने अभिनय की दुनिया में पिता की जग हंसाई ही कराई लेकिन निजी जिंदगी में वह जितेंद्र के आदर्श पुत्र बने। एक इंटरव्यू के दौरान जितेंद्र ने तुषार के बारे में कहा था - मैं जब घर से बाहर निकलता हूं तो उसकी उम्र के लड़कों को देखता हूं और जब शाम को आता हूं तो फिर तुषार को देख्रता हूं फिर मुझे बेटे पर गर्व होता है।' उनकी यह बात काफी हद तक सही भी है। दरअसल, तुषार ने अभिनय की दुनिया में खास पहचान भले ही न बनाई हो लेकिन निजी जिंदगी में वह बेहद संयमित और विवादों से दूर रहते हैं। उनकी पहचान उस आदर्श बेटे के रूप में भी की जा सकती है जिसने विवादों की मायानगरी में रहते हुए भी अपने पिता को झेंपने पर मजबूर नहीं किया। उनकी पहचान उस संजीदा भाई के रूप में भी की जा सकती है जिसने हर कदम पर बहन एकता का साथ दिया। उनकी पहचान उस पिता के रूप में की जा सकती है जिसने सेरोगेसी के जरिए बच्चा पैदा कर सिंगल फादर बनने का जज्बा दिखाया। दरअसल, तुषार ने हमेशा से प्रयोग करने की कोशिश की। फिर वह चाहे बतौर अभिनेता हों या फिर बतौर पिता। तुषार ने कैरियर की शुरुआत वर्ष 2001 में फिल्म 'मुझे कुछ कहना है' से की। इस फिल्म में तुषार ने लवर ब्वॉय की भूमिका निभाई। फिल्म के लिए तुषार को सर्वश्रेष्ठ डेब्यू अभिनेता का फिल्म फेयर पुरस्कार भी दिया गया। लेकिन इसके बाद तुषार की फिल्में टिकट खिड़की पर उनकी उम्मीदों पर खरी नहीं उतरीं। फिल्म के जानकार तुषार को तुक्के का हीरो कहने लगे लेकिन 2004 में तुषार कपूर को राजकुमार संतोषी की फिल्म खाकी में काम करने का अवसर मिला। अमिताभ बच्चन, अक्षय कुमार, अजय देवगन जैसे मल्टीस्टारों के बावजूद तुषार ने अपनी छोटी सी भूमिका से दर्शकों का दिल जीत लिया। अगले ही साल फिल्म 'क्या कूल है हम' के जरिए तुषार ने अपने आप को एक नये अंदाज में दर्शकों के सामने पेश किया। इस फिल्म में उन्होंने हास्य अभिनय से दर्शकों का दिल जीत लिया लेकिन अब भी उन्हें एक पहचान की जरूरत थी। ऐसे में 2006 में तुषार के पास डायरेक्टर रोहित शेट्टी फिल्म 'गोलमाल'लेकर आए। तुषार के कैरियर के लिए यह फिल्म मील का पत्थर साबित हुई।इस फिल्म में तुषार कपूर ने बिना कोई संवाद बोले दर्शकों को हंसाते हंसाते लोटपोट कर दिया। मल्टीस्टारर फिल्म के सीक्वल में भी तुषार के अभिनय की चर्चा हुई। फिल्म शूट आउट एट लोखंडवाला में तुषार के अभिनय का नया अंदाज दर्शकों को देखने को मिला। फिल्म में तुषार कपूर ने अपने नकारात्मक किरदार से दर्शकों को रोमांचित कर दिया। तुषार कपूर ने द डर्टी पिक्चर में भी अपनी छाप छोड़ी। इसके बाद तुषार ने क्या कूल है हम 3 और मस्तीजादे जैसी एडल्ट फिल्मों में भी काम किया।  कहते हैं कि पोर्न स्टार सनी लियोनी के साथ जब कोई रोमांटिक होने को तैयार नहीं था, तब तुषार आगे आए थे और उन्होंने सनी के साथ मस्तीजादे फिल्म में रोमांस किया था।  तुषार की पढ़ाई अमेरिका से हुई है। उन्होंने स्टेफन एम रॉज कॉलेज से बीबीए की डिग्री ली है।



Friday, 24 June 2016

13 लाख वोटों ने बदला ब्रिटेन का भविष्य

 ब्रिटेन यूरोपियन यूनियन (ईयू) से अलग हो गया है। गुरुवार को कराए गए जनमत संग्रह में 52 फीसदी लोगों ने ‘ब्रेग्जिट’ के पक्ष में मतदान किया, वहीं 48 फीसदी वोट ‘रीमेन’ के पक्ष में पड़े। शुक्रवार को नतीजे साफ होने के बाद ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने इस्तीफे की घोषणा कर दी। पीएम ने कहा कि वह जनता के फैसले का सम्मान करते हैं और अक्तूबर में उनके कार्यालय में एक नया प्रधानमंत्री आ जाएगा। कैमरन ने उम्मीद जताई कि ईयू से अलग होने के फैसले से ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था में सुधार होगा। उन्होंने कहा कि देश के आर्थिक हालात अच्छे हैं। हालांकि ब्रिटेन के ईयू से अलग होने की प्रक्रिया में पूरे दो साल लग जाएंगे। ब्रिटिश मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिटेन ने इस जनमत संग्रह के जरिए 43 साल बाद ईयू की सदस्यता छोड़ने का निर्णय लिया है। मतदान प्रक्रिया में 4.6 करोड़ लोगों ने भाग लिया। ईयू में रहने को लेकर जहां 1.16 करोड़ वोट पड़े, वहीं ईयू छोड़ने के पक्ष में 1.74 लोगों ने मतदान किया। करीब 4 फीसदी के अंतर के साथ ब्रिटेन के 13 लाख लोगों ने अपने देश का भविष्य बदल डाला।  

बाजार में हाहाकार, पाउंड में 31 साल की बड़ी गिरावट
जनमत संग्रह के नतीजों के बाद दुनिया और खासतौर से एशियाई शेयर बाजार में हाहाकार मच गया। यूरोप के सभी बाजार गिरावट के साथ बंद हुए तो जापान का निक्कई काफी नीचे चला गया। वहीं पाउंड में 31 साल की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई। यह 1.3229 डॉलर तक पहुंच गया। पाउंड के अलावा ऑस्ट्रेलियाई डॉलर, न्यूजीलैंड डॉलर, मैक्सिकन पैसो, दक्षिण अफ्रीका के रेंड और स्विटजरलैंड, नार्वे, पोलेंड की मुद्रा में भी गिरावट देखी गई। वहीं, भारतीय शेयर बाजार में बीएसई 604.51 अंकों की गिरावट के साथ 26,397.71 पर बंद हुआ। एनएसई 181.85 अंकों की गिरावट के साथ 8,088.60 पर बंद हुआ। 

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क्या है यूरोपियन यूनियन
यूरोपियन यूनियन 28 देशों का महासंघ है, जिसकी संसद में यूरोप के सभी देश अपने चुने हुए सदस्यों को भेजते हैं। इसकी कार्यपालिका में यूरोपियन कमीशन का एक अध्यक्ष होता है, और एक कैबिनेट भी, जिसमें सदस्य देशों के प्रतिनिधि होते हैं। ब्रिटेन वर्ष 1973 से यूरोपियन यूनियन का हिस्सा है, लेकिन इसके बावजूद वह शेष यूरोप से हमेशा आशंकित ही रहा है, जहां बाकी यूरोपीय देशों ने शेनजेन एग्रीमेंट के बाद अपनी सीमाओं से आना-जाना काफी आसान कर दिया, वहीं ब्रिटेन इसके लिए तैयार नहीं हुआ। इसके अलावा बाकी यूरोपीय देशों ने एक ही मुद्रा ‘यूरो’ को अपना लिया, जबकि ब्रिटेन इससे भी बाहर रहा। वह यूरो के लिए अपनी मुद्रा पाउंड स्टर्लिंग को छोड़ने के लिए कभी राजी नहीं हुआ। जिन देशों ने यूरो को अपनाया उनकी इमिग्रेशन पॉलिसी भी एक जैसी तय हुई। रक्षा, आर्थिक क्षेत्र और विदेश नीति पर भी एक राय में फैसले लिए जाने लगे। एक वीजा से पूरे यूरोपीय यूनियन में एंट्री हो सकती है।

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ब्रेक्जिट
‘ब्रेक्जिट’ शब्द दो शब्दों ‘ब्रिटेन’ और ‘एक्जिट’ से मिलकर बनाया गया। लेकिन इसे लेकर ब्रिटेन में दो गुट बन गए। एक का मत ‘रीमेन’ यानी ईयू में बने रहना था, जबकि दूसरे गुट का मत ‘लीव’ यानी ईयू छोड़ देना था।

‘रीमेन’ बनाम ‘लीव’
यूरोपियन यूनियन से बाहर होने यानी ‘लीव’ गुट की दलील थी कि देश की पहचान, आजादी और संस्कृति खतरे में हैं। इसे बचाने के लिए ईयू से अलग होना चाहिए। गुट प्रवासियों पर भी सवाल उठा रहा था। एक दलील यह भी थी कि ईयू ब्रिटिश करदाताओं के अरबों पाउंड ले लेता है, जबकि बदले में उस पर अलोकतांत्रिक फैसले थोपता है। यूरोपियन यूनियन में बने रहने के पक्षधर ‘रीमेन’ गुट की दलील थी कि ऐसा करना अर्थव्यवस्था के लिए फायदेमंद होगा। प्रवासियों का मुद्दा बेहद छोटा है।

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इसलिए हुआ जनमत संग्रह
ब्रिटेन में लंबे समय से यह कहा जा रहा था कि यूरोपियन यूनियन (ईयू) अपने सिद्धांतों से भटक गया है। दलील दी जा रही थी कि यूनियन में शामिल होने के कारण ब्रिटेन अपनी आर्थिक और विदेशी नीति को लेकर आजादी के साथ फैसले नहीं ले पा रहा है। ईयू से अलग होने पर ब्रिटेन अपनी इमिग्रेशन पॉलिसी को लेकर भी खुद फैसले ले सकेगा। डेविड कैमरन जब पीएम बने तो उन्होंने घोषणा की थी कि वह जनमत संग्रह कराएंगे। ब्रिटेन में इंग्लैंड, वेल्स, स्कॉटलैंड और उत्तरी आयरलैंड शामिल हैं।

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फायदा
99 हजार 300 करोड़ की सालाना बचत होगी

ईयू में बने रहने के लिए ब्रिटेन को सालाना 99 हजार 300 करोड़ रुपये फीस चुकानी होती है। यह बचेगी। ईयू में दस हजार अधिकारी काम करते हैं। इसमें कई पूर्व राजनेता है, जो राजनीतिक पारी खत्म होने के बाद वहां प्रवेश कर जाते हैं। इन्हें मोटी रकम सैलरी के तौर पर मिलती है, जो ब्रिटिश पीएम की सैलरी से भी ज्यादा है। ईयू के देशों के मुकाबले ब्रिटेन दुनिया को दोगुना निर्यात करता है। ईयू से बाहर आने पर उसके लिए मुक्त व्यापार के दरवाजे खुलेंगे। सबसे अहम कि ब्रिटेन प्रवासियों के आने पर रोक लगा सकेगा, जिनकी पूर्वी यूरोप में संख्या 20 लाख के करीब है।

नुकसान
लेकिन 100 अरब पौंड तो तुरंत ही डूब जाएंगे

ईयू से बाहर होने पर ब्रिटेन को 100 अरब पौंड का नुकसान हो सकता है। दस लाख नौकरियां डूबने का भी खतरा है। फन्फेडरेशन ऑफ ब्रिटिश इंडस्ट्री के अध्ययन के मुताबिक, ब्रिटेन लंबे समय तक आर्थिक मुश्किल से जूझेगा। घरेलू आय 2100 पौंड और 3700 पौंड के बीच घट जाएगी। बेरोजगारी की दर 5.1 फीसदी से बढ़कर आठ फीसदी तक जा सकती है।


05वीं बड़ी अर्थव्यवस्था है ब्रिटेन दुनिया की, दायरा ती हजार अरब डॉलर।

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भारत पर असर
रुपया
- परिणाम आते ही 60 पैसे लुढ़क कर डॉलर के मुकाबले 68.85 पर पहुंचा रुपया। आरबीआई ने दखल दिया, तब सुधरा। रुपया और गिरा तो भारत के लिए कच्चा तेल खरीदना महंगा हो जाएगा।

इंडस्ट्री
ब्रिटेन में 800 भारतीय कंपनियां हैं। ब्रिटेन से ईयू से बाहर होने पर इन कंपनियों के कारोबार पर असर होगा, क्योंकि ज्यादातर यूरोप के खुले बाजार में बिजनेस कर रही है। 1.1 लाख लोगों को रोजगार देने वाली इन कंपनियों को ईयू और ब्रिटेन को अलग-अलग टैक्स देना होगा। टाटा मोटर्स, एयरटेल और कई फार्मा कंपनियों की चुनौती बढ़ सकती है।

नौकरी
भारत के अलग-अलग हिस्सों से लोग यूरोप में नौकरी के लिए जाते हैं। आंकड़ों के मुतबिक, ब्रिटेन में 20 हजार गोवा के लोग पुर्तगाल के पासपोर्ट पर काम कर रहे हैं। ईयू से अलग होने के बाद इन लोगों के लिए वहां काम करना मुश्किल हो जाएगा। पुड्डुचेरी के लोगों के पास भी पुर्तगाल का पासपोर्ट है, वह भी मुश्किल में आएंगे। पंजाब के लोगों की चुनौती भी बढ़ेगी।

शिक्षा
ईयू से समझौतों के कारण ब्रिटेन के स्कूल, कॉलेजों में अभी तक यूरोपीय छात्रों को छात्रवृत्ति और दाखिले में प्राथमिकता दी जाती है। अब ऐसा नहीं होगा। इससे भारतीय छात्रों के लिए ब्रिटेन में पढ़ाई के अवसर बढ़ेंगे।

मिस्टर परफेक्ट अनिल कुंबले

अगर आपसे कोई सवाल पूछे - ऐसा क्‍या है जो अनिल कुंबले को सबसे ज्‍यादा सम्‍माननीय और प्रेरणादायी भारतीय खिलाड़ी की पहचान दिलाता है? विकल्प हैं - फिरोजशाह कोटला में 74 रन देकर दस विकेट लेना? या वह नेतृत्‍व- जो विवादास्‍पद 'मंकीगेट' सीरीज के दौरान उन्‍होंने ऑस्‍ट्रेलिया में दिया था? या वह एकाग्रता - जिसमें मैच फिक्सिंग के दौर में भी कुंबले ने अपने क्रिकेट जीवन का बेस्ट परफॉर्मेंस दिया। या वह जज्‍बा- जो उन्‍होंने एंटीगा (2002) में जबड़ा टूटा होने के बावजूद गेंदबाजी करते हुए दिखाया था? तो जवाब है: ऊपर दिए ये सभी। लंबे समय तक मूंछे रखने और सज्जन से दिखने वाले कुंबले ने इंजीनियरिग की पढ़ाई की है। वह मैदान के बाहर भी और अंदर भी किसी इंजीनियर सरीखे ही दिखते हैं, सीधे और भोले से। चेहरे से भोले दिखने वाले अनिल कुंबले बतौर गेंदबाज कितने 'दबंग' रहे हैं?, जिन्होंने उनके सामने बल्लेबाजी की है, वो सब समय - समय पर बताते रहे हैं। कुंबले के रिकॉर्ड और उनकी शख्सियत के बारे में क्रिकेट की समझ रखने वाला हर इंसान जानता है लेकिन बहुत कम लोग इस रोचक तथ्य को जानते होंगे कि 6.2 इंच के अनिल के नाम के साथ लगा 'कुंबले' उनकी जाति नहीं बल्कि गांव का नाम है। बंगलोर में जन्में, कुंबले को कम उम्र से ही क्रिकेट में रूचि पैदा हो गई थी। वह बी एस चंद्रशेखर जैसे क्रिकेटरों का खेल देखते हुए बडे हुए। कुंबले का वैवाहिक जीवन भी बेहद ही दिलचस्प रहा है। उनका दिल तलाकशुदा चेतना पर आया। चेतना की पहले पति से एक बेटी आरुनी  भी थी लेकिन कुंबले ने उसे हाथों हाथ लिया और 1999 में शादी कर ली। शादी के बाद उनके दो बच्चे, बेटा मायस कुंबले और बेटी स्वास्ती हुए।  कुंबले ने अपने सम्‍मान और त्‍याग को टीम और परिवार के हित से ऊपर कभी नहीं रखा। जब जरूरत पड़ी तो उन्होंने पत्नी चेतना के लिए उनके पहले पति से कानूनी लड़ाई भी लड़ी । यह लड़ाई बेटी को हासिल करने की थी। कुंबले ने इस लड़ाई में चेतना का हर कदम पर साथ दिया और उनकी शख्सियत के मुताबिक उन्हें जीत भी मिली। कोई यह कैसे भूल सकता है जब वेस्टइंडीज में भारत का मैच हो रहा था। उस वक्त कुंबले को पहले कहा गया कि वो मैच में खेल रहे हैं, फिर कहा गया कि नहीं खेल रहे हैं, फिर दोबारा से कहा गया कि खेल रहे हैं।  कुंबले जिंक का पेंट लगाकर मैदान का चक्कर काट रहे थे। आख़िरकार जब टीम की घोषणा हुई तो उसमें कुंबले का नाम नहीं था। एक सीनियर खिलाड़ी के साथ इस तरह का बर्ताव हुआ, लेकिन जब भारत टेस्ट मैच जीत गया तो सबसे अधिक खुश जो खिलाड़ी था वो थे अनिल कुंबले। उस वक्त वो अपने कैमरे से पूरी टीम की खुशी मनाते हुए फोटो खींच रहे थे। कुंबले के साथ यह हरकत कप्तान सौरव गांगुली ने की थी फिर भी वह कुंबले को 'जेंटलमैन' कहते हैं क्‍योंकि उन्‍होंने कभी निजी मनमुटाव को सामने नहीं आने दिया। हां, एक बार हुआ था कुछ ऐसा जब 2001 में अपनी कंधे की सर्जरी के बाद से कुंबले खराब दौर से गुजर रहे थे। 2003-04 की ऑस्‍ट्रेलिया सीरीज के ब्रिसबेन टेस्‍ट के लिए गांगुली ने जो अंतिम 11 खिलाड़ी तय किए, उसमें कुंबले को बाहर कर हरभजन को शामिल किया। पहले दिन का खेल खत्‍म होने के बाद जब टीम होटल पहुंची तो गांगुली अपने परिवार के साथ हो लिए लेकिन शाम को ही कुंबले ने उनके कमरे का दरवाजा खटखटाया और बोले, 'मैं इस टेस्‍ट के खत्‍म होते ही संन्‍यास लेना चाहता हूं और जल्‍द से जल्‍द घर वापस जाना चाहता हूं।' गांगुली के पैरों तले जमीन खिसक गई थी। वह कुछ पल के लिए कुंबले का चेहरा देखते रह गए। आखिर उन्‍होंने भीतर से अपनी पत्‍नी डोना को बुलवाया और मिस्टर परफेक्ट कुंबले को समझाने को कहा। और संयोग देखिए, हरभजन की उस टेस्‍ट में अंगुली टूट गई और उन्‍हें सर्जरी करानी पड़ी। बाकी सीरीज के लिए कुंबले टीम में आए और उन्‍होंने अगले तीन टेस्‍ट में 24 विकेट लिए।

प्रोफाइल
अनिल कुंबले
मुख्य भूमिका - लेग स्पिनर



क्रिकेट करियर
फॉर्मेट    मैच    रन       विकेट    बेस्ट     100    50    इकोनॉमी    4     5ू    10 (विकेट)
टेस्ट -132    2506    619    10/74    1      5    29.65     31  35    8
वनडे - 271    938     337    6/12      0      0    30.89      8     2     0
टी 20 - 54    46        57    5/5         0     0    24.36      2     1     0  (आईपीएल में )



टेस्ट डेब्यू : इंग्लैंड बनाम भारत (अगस्त 1990, मैनेचेस्टर )  
आखिरी टेस्ट : भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया (अक्तूबर 2008, दिल्ली)

वनडे डेब्यू : भारत बनाम श्रीलंका  (अप्रैल 1990, शारजाह )
आखिरी वनडे :  भारत बनाम बरमूडा (मार्च 2007, पोर्ट ऑफ स्पेन  )



जज्बे की मिसाल
कुंबले न सिर्फ  अपनी बेहतरीन गेंदबाजी के लिए जाने जाते हैं बल्कि उनको संघर्षशील खिलाड़ी के रूप में भी जाना जाता है। ऐसा ही एक वाकया 2002 में टीम इंडिया के वेस्टइंडीज दौरे पर एंटीगुआ टेस्ट के दौरान देखने को मिला जब जबड़ा टूटने के बावजूद टीम की जरूरत को देखते हुए पूरे चेहरे पर पट्टी बांधकर वह मैदान पर उतरे और विपक्षी टीम के सबसे मजबूत खिलाड़ी ब्रायन लारा का महत्वपूर्ण विकेट भी टीम के लिए हासिल किया।