Friday, 29 April 2016

'मैं तुम्हें अपना 5 सेकेंड भी क्यों दूं'


जिन लोगों ने शाहरुख खान की हालिया फिल्म फैन को देखी है, वह इस डायलॉग से बखूबी वाकिफ होंगे। दरअसल, फिल्म में प्रशंसक गौरव अपने हीरा आर्यन खन्ना से बेइंतहा मोहब्बत करता है लेकिन जब उसकी मुलाकात आर्यन से होती है तो वह एक ही झटके में गौरव के संजोए अरमानों को कूचल देता है। ये सच गौरव पचा नहीं पाता और फिर फिल्म में एक्‍शन, ड्रामा शुरू हो जाता है। बहरहाल, शाहरुख की फिल्म फैन की कमाई को देखें तो लगता है कि दर्शकों ने भी उनके लिए यही "डायलॉग" चेप दिया है।  फिल्म फैन ने पहले हफ्ते में सिर्फ 71 करोड़ रुपये की कमाई की। अहम बात यह रही कि सौ करोड़ को छूने में यह फिल्म पूरी तरह हांफ गई।  शाहरुख जैसे बड़े सितारे की फिल्म हफ्ते भर में भी सौ करोड़ के आंकड़े को पार नहीं कर सके तो यह हैरानी की बात है।  शाहरुख की फिल्म से पहले वीकेंड में 100 करोड़ और दूसरे वीकेंड में 150 से 200 करोड़ की कमाई की उम्मीद की जाती है लेकिन उनकी पिछली कई फिल्मों के साथ इसका उलट हुआ।   तो क्या यह मान लिया जाए कि शाहरुख का स्टारडम खतरे में है ? या फिर शाहरुख की एक्टिंग में धार नहीं दिख पा रही है ? इसमें कोई दो राय नहीं कि शाहरुख की पहचान सिर्फ बादशाह या किंग जैसे नामों से नहीं है बल्कि उन्हें बॉलीवुड को रोमांस का पाठ पढ़ाने वाले दिलवाले के रूप में भी जाना जाता है। लेकिन एक सच यह भी है एक खास वर्ग को शाहरुख की व्यक्तिगत छवि बाकी के दोनों खानों यानी सलमान और आमिर से कहीं ज्यादा घृणित करती है। यह भाव आमिर और सलमान के खिलाफ भी है लेकिन उनके साथ बीइंग ह्यूमन और सत्यमेव जयते का तमगा भी जुड़ा रहा। लेकिन शाहरुख की त्रासदी ही है कि वह आमिर और सलमान की तरह खुद को कभी बतौर समाजसेवी प्रस्तुत भी नहीं कर सकें।  वर्ना उनका कैरियर सही मायने में संघर्ष करने वाले लोगों को प्रेरित कर सकता है क्योंकि वह किसी फिल्मी परिवार से नहीं आते बल्कि एक साधारण से परिवार का संघर्ष हैं।  हालांकि सिर्फ इस आधार पर हम शाहरुख के कैरियर की गिरावट की समीक्षा नहीं कर सकते।  सच यह है कि शाहरुख की एक्टिंग में भी गिरावट आई है। जो शाहरुख सिग्नेचर पोज देकर दर्शकों को बांहों में समेट लेते थे वह जादू अब खत्म सा हो गया है। ऐसा लगता है कि अब यह सब बनावटीपन है। इसके इतर आमिर और सलमान ने अपनी एक्टिंग को उम्र के साथ निखारा भी है और अब एक्टिंग में मैच्योरिटी सी दिखती है। और यही वजह है कि आंकड़े इन दोनों के पक्ष में हैं। बहरहाल, शाहरुख खान की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म चेन्नई एक्सप्रेस है। उनकी पिछली फिल्में कलेक्शन में लगातार पिछड़ रही हैं।  2013 में ईद पर रिलीज हुई चेन्नई एक्सप्रेस ने 227 करोड़ की कमाई की थी। 2014 में शाहरुख ने अपनी फेवरेट रिलीज डेट दिवाली पर हैप्पी न्यू ईयर से वापसी की। इस फिल्म ने पहले दिन 45 करोड़ और पहले सप्ताह में 109 करोड़ की कमाई की लेकिन बाद में ये फिल्म 203 करोड़ के कलेक्शन पर सिमट गई। बीते साल क्रिसमस पर रिलीज हुई दिलवाले तो महज 148 करोड़ की कलेक्शन के साथ 150 करोड़ का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाई।   वहीं उनके प्रतिद्वंद्वी आमिर खान और सलमान खान तीन सौ करोड़ के आंकड़े अर्जित कर रहे हैं लेकिन शाहरुख दो सौ करोड़ तक भी पहुंच नहीं पाते। कमाई के आंकड़े को देखें तो आमिर खान की फिल्म पीके 340 और सलमान खान की फिल्म बजरंगी भाईजान 320 करोड़ की कमाई कर चुकी है लेकिन शाहरुख खान की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म चेन्नई एक्सप्रेस थी। उनकी पिछली फिल्में कलेक्शन में लगातार पिछड़ रही हैं।  2013 में ईद पर रिलीज हुई चेन्नई एक्सप्रेस ने 227 करोड़ की कमाई की थी। 2014 में शाहरुख ने अपनी फेवरेट रिलीज डेट दिवाली पर हैप्पी न्यू ईयर से वापसी की। इस फिल्म ने पहले दिन 45 करोड़ और पहले सप्ताह में 109 करोड़ की कमाई की लेकिन बाद में ये फिल्म 203 करोड़ के कलेक्शन पर सिमट गई। बीते साल क्रिसमस पर रिलीज हुई दिलवाले तो महज 148 करोड़ की कलेक्शन के साथ 150 करोड़ का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाई।



सारे हथकंडे अपनाए फिर ‌भी पिट गए
यह भी सच है कि शाहरुख ने अपनी फिल्म फैन के लिए सभी तरह के हथकंडे भी अपनाए।   फिल्म फैन की रिलीज से पहले शाहरुख खान और उनके प्रशंसकों के ऊपर काफी दबाव भी था। यही वजह थी कि रिलीज से पहले शाहरुख खान के प्रशंसकों ने ट्विटर पर 'फैन' को दो हफ्ते तक ट्रेंड बनाए रखा तो कई शहरों में फिल्म के फैंस स्पेशल शोज की भी खबर आई। यही नहीं किंग खान ने भी फिल्म को प्रमोट करने में अपनी तरफ से कोई कसर नहीं छोड़ी। शाहरुख ने  पहली बार फिल्म में उनकी परफॉर्मेंस के लिए बधाई देने वाले तमाम फिल्म स्टार्स के ट्वीट को रीट्वीट भी किया। इसके अलावा किंग खान ने पहली बार फेसबुक और ट्विटर पर वीडियो पोस्ट कर अपने फैंस को फिल्म देखने के लिए शुक्रिया कहा। शाहरुख ने मेकिंग ऑफ शाहरुख टू गौरव और फिल्म के शूट के कुछ वीडियो भी पोस्ट किए। कुछ जानकारों का कहना है कि फिल्म फैन के अच्छा परफॉर्म नहीं कर पाने की एक ही वजह है कि ऑडियंस ने फिल्म को पसंद नहीं किया। फिल्म को लेकर एक राय यही है कि फर्स्ट हाफ अच्छा है लेकिन इंटरवल के बाद लोगों को बड़ा अटपटा लगा, इसलिए फिल्म की कमाई कम हो गई। हालांकि कोमल नाहट जैसे फिल्म जानकारों का कहना है कि यह कहना गलत होगा कि शाहरुख का स्टारडम खत्म हो गया है। फिल्म को लोग खराब बता रहे हैं लेकिन शाहरुख के काम को कोई खराब नहीं बता रहा। वहीं ट्रेड एनलिस्ट गिरीश जौहर ने ट्वीट किया कि फिल्म में शाहरुख खान की अच्छी परफॉर्मेंस होने के बावजूद फैंस ने फिल्म को इसलिए पसंद नहीं किया क्योंकि यह अच्छी नहीं लिखी गई थी। इसके अलावा इसमें कुछ भी एक्साइटिंग नहीं लगा।


रईस की राह आसान नहीं
शाहरुख के सामने सबसे बड़ा संकट अपनी आगामी फिल्‍म रईस को लेकर है। किंग खान अपने होम प्रोडक्शन हाउस के बैनर तले बनी इस फिल्म की रिलीज डेट इस साल ईद पर एलान कर चुके हैं। वहीं आदित्य चोपड़ा के बैनर की सलमान खान स्टारर सुल्तान भी ईद पर रिलीज होगी। सलमान और आदित्य दोनों ही शाहरुख के खास हैं। ईद के बाद 15 अगस्त पर ऋतिक रोशन की फिल्म मोहनजोदड़ो और अक्षय कुमार की रुस्तम, दो अक्तूबर को विशाल भारद्वाज की रंगून, दिवाली पर अजय देवगन की 'शिवाय' और करण जौहर की 'ए दिल है मुश्किल' और क्रिसमस पर आमिर खान की दंगल रिलीज होगी। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि किंग खान रईस को आगे बढ़ा कर किससे पंगा लेंगे।

बच्चे से भी मिली शिकस्त
फिल्म जानकारों का मानना है कि शाहरुख की फिल्म फैन 'द जंगल बुक' से हार गई है। फिल्म 'द जंगल बुक'  में मोगली (नील सेठी) का  किरदार दर्शकों को खूब पसंद आ रहा है।  यह 2016 में भारत की सबसे बड़ी हिट साबित हुई है। अभी तक ‍किसी भी भारतीय फिल्म ने इस साल इतनी कमाई नहीं की है। यह ब्लॉकबस्टर फिल्म अब तक 133 करोड़ रुपये कमा चुकी है। अब यह कमाई 'एयरलिफ्ट' से ज्यादा है। तीसरे हफ्ते में भी कमाई की रफ्तार तेज है।  दस दिन पहले ही इसने 100 करोड़ क्लब में एंट्री ली थी। यह अपने पहले हफ्ते में ही 74 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार करने में कामयाब हो गई थी। 'द जंगल बुक' भारत में आठ अप्रैल को चार भाषाओं हिंदी, अंग्रेजी, तमिल और तेलुगु में रिलीज हुई।  बता दें कि जॉन फेवरू की फिल्म 'द जंगल बुक' रूडयार्ड किपलिंग की किताब पर बेस्ड है। इस फिल्म के हिंदी वर्जन में इरफान, नाना पाटेकर, प्रियंका चोपड़ा और ओमपुरी जैसे कई दिग्गज कलाकारों ने अपनी आवाज दी है।

 

Sunday, 24 April 2016

बच के कहां जाओगे बच्चू


इंट्रो - फिल्मी और खेल सितारे अगर किसी ब्रांड का प्रचार करते हैं तो अब उनको सावधान रहने की जरूरत होगी क्योंकि भ्रामक विज्ञापनों को लेकर सरकार कानून बनाने जा रही है। इसके जरिए उन पर शिकंजा कसा जा सकता है। यानी अब वे प्रचार में किए गए दावों-वायदों के प्रति अपनी जिम्मेदारी-जवाबदेही से बच नहीं सकेंगे।

कुछ साल पहले महानायक अमिताभ बच्चन ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट-अहमदाबाद में दिए एक व्याख्यान में कहा था, 'मेरे पास एक छोटी बच्ची आई और उसने कहा कि आप पेप्सी जैसी चीजों के विज्ञापन क्यों करते हो जिनके बारे में मेरी टीचर कहती हैं कि उसमें जहर होता है।' अमिताभ के मुताबिक इसके बाद उन्होंने अपने आपको पेप्सी से अलग कर लिया। वैसे इस बात के लिए अमिताभ को मिली जुली प्रतिक्रिया मिली।  जहां कुछ लोगों ने उनके इस कदम को सराहनीय बताया वहीं कई लोगों का ये भी मानना था कि जिस प्रोडक्ट से अमिताभ बच्चन लंबे समय तक जुड़े रहे, बाद में उसके बारे में उन्हें ऐसी 'आपत्तिजनक' बात नहीं कहनी चाहिए थी कुछ लोगों ने ये भी कहा कि अमिताभ तकरीबन आठ साल पेप्सी से जुड़े रह, तब उन्हें इसके जहरीले होने की और लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की चिंता क्यों नहीं सताई ? संभवतः अमिताभ की यह कहानी फिल्मी रही हो लेकिन सवाल है कि
क्या सितारे किसी विज्ञापन को करने से पहले रिसर्च करते हैं? क्या किसी प्रोडक्ट का ब्रांड एंबेसडर बनने से पहले वह अपनी सामाजिक ज़िम्मेदारियों के बारे में भी सोचते हैं ? क्या वह उस खास प्रोडक्ट के बारे में पूरी पड़ताल करते हैं या वह उस विज्ञापन को करने से मिलने वाले पैसे पर ही ध्यान देते हैं ? क्यों‌कि पिछले दिनों जब आम्रपाली ग्रुप के ब्रांड एंबेसडर भारतीय क्रिकेट कप्तान महेंद्र
सिंह धोनी पर लोगों का गुस्सा फूटा तो उन्होंने खुद को  ब्रांड एंबेसडर पद से अलग कर लिया। धोनी ने जाते - जाते लोगों के हित के लिए आम्रपाली ग्रुप से एक औपचारिक विनती भी कर दी। दरअसल ग्रेटर नोएडा में घर खरीदारों को वक्त पर मकान ना दे पाने की वजह से ग्राहकों में आम्रपाली बिल्डर के खिलाफ जबरदस्त गुस्सा है। गुस्सा जायज भी है, क्योंकि मध्यम‌वर्गिय परिवार को एक घर के सपने के पीछे पूरी जिंदगी को दांव पर लगा देनी पड़ती है और उन सपनों को पंख देने का काम बड़े - बड़े सितारे ब्रांड एंबेसडर के रूप में करते हैं लेकिन जब उन्हें हक दिलाने की बारी आती है तो चुपके से किनारे हो लेते हैं।  सवाल है कि क्या किसी कंपनी का ब्रांड एंबेसडर,  ऐसा गैर जिम्मेदाराना रवैया अपना सकता है ? बहरहाल, सितारों द्वारा भ्रामक विज्ञापन के चलते मोह जाल में फंस जाने वाले उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए संसदीय समिति उपभोक्ता संरक्षण कानून में जिन संशोधनों पर विचार कर रही है, उन्हें अगर संसद से मंजूरी मिल गई तो फिर सितारे प्रचार में किए गए दावों-वायदों के प्रति अपनी जिम्मेदारी-जवाबदेही से बच नहीं सकेंगे। संसदीय समिति के विचाराधीन प्रस्तावों के मुताबिक पहली बार भ्रामक प्रचार का दोषी पाए जाने पर सितारे को 10 लाख रुपये दंड या दो साल की सजा अथवा दोनों हो सकते हैं। दूसरी बार भ्रामक प्रचार का दोषी पाए जाने पर 50 लाख रुपये दंड या पांच साल की सजा का प्रावधान होगा।  यह सर्वविदित तथ्य है कि देर से ही सही, इस पहल की जरूरत भ्रामक विज्ञापनों के बेलगाम सिलसिले से ही रेखांकित हुई है। पिछले साल जब मैगी नूडल्स के सैंपल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पाए गए, तब महानायक अमिताभ बच्चन समेत अनेक बड़े सितारे अपने प्रशंसकों के प्रति जिम्मेदारी-जवाबदेही के सवाल पर कठघरे में खड़े नजर आए। बड़ी मासूमियत से सफाई देने की कोशिश की गई कि उनके लिए प्रचारित उत्पादों-सेवाओं की गुणवत्ता-विश्वसनीयता जांच पाना संभव नहीं है। निश्चय ही यह सफाई कानून सम्मत समाज में स्वीकार्य नहीं हो सकती। फिल्मी सितारे हों या खेल सितारे, वे अपने लाखों प्रशंसकों के प्रति जिम्मेदारी-जवाबदेही से मुक्त नहीं हो सकते, जो उनके नाम-चेहरे से ही किसी उत्पाद के खरीददार बन जाते हैं।

अब जिम्मेदार भी होगी तय
सितारों द्वारा भ्रामक विज्ञापन के चलते मोह जाल में फंस जाने वाले उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए संसदीय समिति उपभोक्ता संरक्षण कानून में जिन संशोधनों पर विचार कर रही है, उन्हें अगर संसद से मंजूरी मिल गई तो फिर सितारे प्रचार में किए गए दावों-वायदों के प्रति अपनी जिम्मेदारी-जवाबदेही से बच नहीं सकेंगे। संसदीय समिति के विचाराधीन प्रस्तावों के मुताबिक पहली बार भ्रामक प्रचार का दोषी पाए जाने पर सितारे को 10 लाख रुपये दंड या दो साल की सजा अथवा दोनों हो सकते हैं। दूसरी बार भ्रामक प्रचार का दोषी पाए जाने पर 50 लाख रुपये दंड या पांच साल की सजा का प्रावधान होगा।  अगर अन्य देशों में कानून की बात करें तो अमेरिका में फेडरल ट्रेड कमॉशियल एक्ट के तहत विज्ञापन में प्रोडक्ट के बारे में दावा करने वाली सेलिब्रेटी को असल जिंदगी में भी उसका इस्तेमाल करना पड़ता है।  कंपनी सिर्फ तब तक एक सेलिब्रेटी का इस्तेमाल विज्ञापन में कर सकती है जब तक उसे यकीन होता है कि प्रोडक्ट पर सेलिब्रेटी का विश्वास कायम है।  वहीं जापान में भ्रामक प्रचार का दोषी पाये जाने के बाद सेलिब्रेटी को सार्वजनिक तौर पर माफी मांगनी पड़ती है, इससे उसकी साख को भी नुकसान पहुंचता है।  दक्षिण कोरिया में बनाए गए कड़े नियमों का पालन विज्ञापन करने वाली हस्तियों को करना पड़ता है और प्रोडक्ट्स से जुड़ी ज़िम्मेदारियों में सेलिब्रेटियों की भी जवाबदेही होती है। चीन में स्टेट एडमिनिस्ट्रेशन आफ इंडस्ट्री एंड कॉमर्स के पास देश की गलत छवि बनाने वाले और भ्रामक प्रचार करने वाले सितारों के खिलाफ कार्रवाई का अधिकार है।


भरोसा पहले, पैसा बाद में
कई ऐसे भी सितारे हुए हैं जिन्होंने अपने प्रशंसकों के भरोसे को बनाए रखा है। अभिनेत्री कंगना रनौत ने फेयर एंड लवली ब्रांड का ऑफर ठुकरा दिया था। उन्‍हें यह ऑफर करीब दो करोड़ का मिल रहा था। इस दौरान कंगना ने कहा कि वह एक सेलिब्रेटी हैं और वह अगर ऐसे ऐड करेंगी तो लोगों को उन पर विश्‍वास हो जाएगा और हो सकता वह उनके भरोसे पर इसका इस्‍तेमाल भी करें। इसलिए उन्‍होंने साफ मना कर दिया कि चंद पैसों के लिए वह लोगों के विश्‍वास से धोखा नही कर सकती हैं। इसके अलावा रिचा चड्ढा भी एक बार ब्रांडेड विज्ञापन को लेकर चर्चा में रह चुकी हैं। वह भी एक फेयरनेस क्रीम के विज्ञापन को ठुकरा चुकी हैं। उन्‍होंने इस यह कह कर एक बडा़ ऑफर ठुकरा दिया था कि वह अपने आदर्शों को बेचकर विज्ञापन नहीं कर सकती हैं।  रितिक रोशन ने भी समाज के प्रति अपनी मानवीय भावना को दर्शा चुके हैं।  दिसंबर 2012 में उन्‍हें एक मोबाइल कंपनी की ओर से 20 करोड़ रुपये तक की पेशकश की गई थी लेकिन रितिक ने यह कहकर मना कर दिया है कि मुझे नहीं लगता कि जो चीजें इस विज्ञापन में दिखाई जाएंगी वह हकीकत में लोगों तक पहुंच सकेंगी। ऐसे में जब लोग खरीदेंगे और उन्‍हें वे फीचर नहीं मिलेंगे तो उन्‍हें बुरा लगेगा।  आमिर खान भी भ्रम फैलाने वाले विज्ञापनों से बचने के प्रयास में रहते हैं। ऐसे मे वह भी साल 2013 में जब सत्‍यमेव जयते शो को लेकर लोगों के बीच छाए थे, तभी उन्‍होंने भी एक बड़ी गाड़ी की कंपनी के ऑफर को ठुकराया था। उन्‍होंने एक लक्जरी कार ब्रांड को यह कहकर मना कर दिया था कि वह लोगों को गुमराह नहीं कर सकते हैं।  शिल्‍पा शेट्टी भी एक बडे अंतरराष्ट्रीय फूड ब्रांड के विज्ञापन ऑफर को ठुकरा चुकी हैं। इसको लेकर शिल्‍पा सोशल मीडिया पर भी छाई रही हैं। उन्‍होंने यहां तक कहा था कि एक पत्‍नी और मां होन के नाते मैं ऐसी चीजों को बढा़वा नहीं दे सकती हूं जो लोगों के स्‍वास्‍थ्‍य के साथ खिलवाड़ करें। मैं ऐसे विज्ञापन करने के सख्‍त खिलाफ हूं। अभिनेता अनिल कपूर भी इन भ्रामक विज्ञापनों के खिलाफ हैं। उन्‍होंने भी व्हिस्की ब्रांड जूड लॉ की एक लघु फिल्‍म के ऑडियो अनवारण में शामिल हुए थे। इस दौरान अनिल ने कहा था कि ये मीडिया से कहा था कि वह एक शराब ब्रांड को अपना समर्थन नहीं दे सकते हैं। इसी तरह अभिनेता नवाजद्दीन सिद्दिकी ने भी एक बडे ब्रांड का ऑफर ठुकरा दिया था।

विवाद के साए में
ब्रांड की चमक

विवाद कई बार ब्रांड और ब्रांड एंबेसडर को फायदा भी पहुंचाते हैं । मसलन, कल्याण ज्वैलर्स को सिर्फ एक विदेशी ज्वैलर्स चेन के रूप में लोग जानते थे, जो भारतीयों की सोने के प्रति चाहत को आधार बनाकर अपना कारोबार चलाता है।  लेकिन एक विज्ञापन के दौरान नस्लवाद और बच्चों की गुलामी को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए जब ऐश्वर्या राय बच्चन पर निशाना साधा गया तो कल्याण ज्वैलर्स को तो इससे तुरंत प्रचार मिल गया है।  ज्वैलर्स ने विज्ञापन को वापस लिया लेकिन उसका पूरा फायदा लेने के बाद।  मार्केट के जानकारों की मानें तो इस विवाद ने ब्रांड को और चर्चित कर दिया। ऐश्वर्या की तरह ही निकोल किडमैन भी एक विज्ञापन की वजह से परेशान हुई थीं। वह एतिहाद एयरवेज की विदेशी एयरबस 380 के विज्ञापन में दिखाई दी थीं। एसोसिएशन ऑफ प्रोफेशनल फ्लाइट अटैंडेंटस् ने एक पत्र लिखकर निकोल से मांग की थी कि वह खुद को एयरलाइन से अलग कर लें, जिसकी नीतियां महिला कर्मचारी विरोधी थीं।  एसोसिएशन ने इस पत्र में निकोल को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर दिए गए उनके प्रेरक भाषण की याद भी दिलाई। ट्विटर पर हुए हंगामे ने निकोल और एतिहाद एयरवेज को मुफ्त का प्रचार दिलाया।  एक प्रमुख चिप्स ब्रांड पोपचिप्स की बिक्री में खासा इजाफा हुआ, जब हॉलीवुड स्टार एश्टन कुचर इसके एक ऑनलाइन विज्ञापन में दिखाई दिए। एक बॉलीवुड निर्माता के रूप में, जो प्यार की तलाश में है। भारतीय-अमेरिकी समुदाय ने भारतीयों को गरीब दिखाने के लिए कुचर पर अपना गुस्सा निकाला। विज्ञापन वापस ले लिया गया, लेकिन पोपचिप्स की खपत अभी भी भारतीय-अमेरिकियों में ज्यादा होती है। सोडास्ट्रीम, इजराइल की सोडा मशीन बनाने वाली यह कंपनी उस वक्त सुर्खियों में आई जब स्कारलेट जोहानसन ने इसके ब्रांड एंबेसडर के रूप में काम करने से मना कर दिया। जोहानसन ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि एक मानवतावादी संगठन ऑक्सफेम ने इजराइल के साथ किसी भी तरह के व्यापार का विरोध किया था। यह विवाद प्रोडक्ट के भविष्य के लिए अच्छा था।


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जब एंबेसडर फंसे तो
कंपनी ने बना ली दूरी
विज्ञापन की दुनिया में कई ऐसे मौके भी आए हैं जब ब्रांड एंबेसडर मुसीबत में फंसे हैं तो कंपनी ने उनका साथ देने की बजाए दूरी बना ली है।  अमिताभ बच्‍चन और महेंद्र सिंह धोनी के अलावा कई अन्‍य उदाहरण भी हैं।  हाल ही में असहिष्‍णुता पर बयान देकर फंसे आमिर खान का विरोध बढ़ा तब स्नैपडील ने उनसे मुंह मोड़ लिया। वहीं   टेनिस की दुनिया की सबसे खूबसूरत महिला खिलाड़ी मारिया शारापोव हाल ही में डोपिंग टेस्ट में फेल होने की वजह से प्रतिबंधित कर दी गई हैं। इसका सबसे बड़ा असर उनके विज्ञापन बाजार पर पड़ा और नाइके स‌हित कई बड़ी कंपनियों ने उनसे नाता तोड़ लिया। जबकि  अमेरिका के धावक जस्टिन गैटलिन पर 2004 एथेंस ओलंपिक में डोपिंग टेस्ट में फेल होने की वजह से चार साल का बैन लगा। इसका असर यह हुआ कि स्पोर्ट्स की बड़ी कंपनी नाइके ने उनसे करार तोड़ लिया।  जब 2013 में दक्षिण अफ्रीका के पैरालिंपिक एथलीट ऑस्कर पिस्टोरियस पर प्रेमिका रीवा स्टीनकैंप के खून का आरोप लगा तब स्पोर्ट्स कंपनी ओकले ने उनसे नाता तोड़ लिया वहीं नाइके ने भी अनुबंध को आगे नहीं बढ़ाया। मशहूर फुटबॉलर और अमेरिकन मूवी स्टार सिंपसन को कैलिफॉर्निया में पूर्व पत्नी और उसके दोस्त की हत्या और कसीनो में डकैती के अपराध में गिरफ्तार किया गया। इस घटना के बाद अमेरिका की हार्टज कार कंपनी ने सिंपसन से करार तोड़ दिया। इस कंपनी से सिंपसन को हर साल पांच लाख डॉलर यानी करीब 3.50 करोड़ रुपये की आमदनी होती थी। ऑस्ट्रेलिया की तीन बार ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता तैराक स्टेफनी राइस से जगुअर कार कंपनी ने तब दूरी बना ली जब उन्होंने 2010 में समलैंगिकों के विरोध में ट्वीट किया। यह कंपनी उन्हें करीब एक लाख डॉलर का भुगतान करती थी। अमेरिका की पॉप स्टार माडोना से 1989 में पेप्सी ने करार तोड़ लिया। माडोना ने उस दौरान चर्च और कैथोलिक समुदाय के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। 1988 में पत्नी द्वारा गाली - गलौच के आरोप के बाद मुक्केबाज माइक टायसन से पेप्सी ने करार तोड़ लिया। डोपिंग में फंसने के बाद लांस आर्मस्ट्रांग से नाइके, ट्रेक साइकल्स, एफआरएस जैसी बड़ी कंपनियों ने करार तोड़ लिया। 2010 में सेक्स स्कैंडल में फंसने के बाद अमेरिका के दिग्गज गोल्फर टाइगर वुड्स से पेय पदार्थ कंपनी गेटोरेड जीएम ने करार तोड़ लिया। एयरपोर्ट के बाहर स्मोकिंग करते हुए अमेरिका के स्टार तैराक फेलेप्स की तस्वीर सार्वजनिक होने के बाद खाद्य प्रोडक्ट केलॉग ने उन्हें अपना एंबेसडर बनाने से इन्कार कर दिया। 2001-02 में सलमान की गाड़ी से फुटपाथ पर सो रहे एक मजदूर की कुचलकर मौत हो गई, चार घायल हो गए। इस घटना के बाद थम्सअप कोल्ड ड्रिंक ने सलमान खान से करार तोड़ लिया । मुंबई की टाडा अदालत ने 2007 में संजय दत्त को आर्म्स एक्ट के तहत छह साल कैद की सजा सुनाई । इस घटना के बाद कोलकाता की गारमेंट्रस कंपनी रूपा ने उनसे करार तोड़ लिया। माडल कैट मोस को हवाई अड्डे पर स्मोकिंग करते हुए पकड़ा गया तो उनसे ट्रेवन कार कंपनी ने करार तोड़ लिया। वहीं इंग्लैंड के फुटबॉलर रूनी को 2010 में पेप्सी ने नाता तोड़ लिया। रूनी पर पत्नी को धोखा देने का आरोप लगा था।

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विज्ञापन की दुनिया बेहद दिलचस्प है। कंपनियां विज्ञापन के जरिए अपने प्रोडक्ट और ब्रांड वैल्यू बढ़ाती हैं। इसके लिए सेलेब्रिटीज को कंपनी के साथ जोड़ा जाता है। लेकिन कुछ विज्ञापन अपनी स्क्रिप्टिंग और प्रेजेंटेशन के चलते विवादों में घिर जाते हैं। जनता के बीच ऐसे विज्ञापनों का चेहरा कोई सेलेब्रिटी होता है तो उसे भी विवादों से जूझना पड़ता है। इनमें अभिनेताओं की तो किरकिरी होती ही है, साथ ही राज्य व केंद्र सरकार की भी टेंशन बढ़ जाती है।

विज्ञापनः किसान चैनल
विवादः जुलाई, 2015 विज्ञापन के बदले अमिताभ बच्चन पर 6.31 करोड़ रुपये लेने का आरोप
मामल - केंद्र सरकार ने मई में ही किसान चैनल लॉन्च किया है। इसके विज्ञापन के लिए बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन को लिया गया था। दावा है कि बॉलीवुड महानायक अमिताभ बच्चन ने किसान चैनल का विज्ञापन करने की लिए फीस ली है। जबकि अमिताभ बच्चन ने खुलासा किया उन्होंने कोई फीस नहीं ली है।  इसके अलावा पिछले साल तक अतुल्य भारत के ब्रांड एंबेसडर रहे आमिर खान जब इंटॉलरेंस पर फंसे तो अमिताभ बच्चन को अतुल्य भारत का एंबेसडर बनाने की तैयारी शुरू हो गई । लेकिन हाल ही में टैक्स चोरी से जुड़े पनापा पेपर्स मामले में उनका नाम उछला तो इसका खामियाजा बिग बी को इसके एंबेसडर से हटा दिया गया।

कल्याण ज्वैलर्स
विवादः अप्रैल, 2015 में नस्लभेदी और बाल मजदूरी को बढ़ावा देने का आरोप लगा।
क्या था मामला
अभिनेत्री ऐश्वर्या राय बच्चन ने कल्याण ज्वैलर्स के साथ 10 करोड़ रुपए सालाना में करार किया था। उन पर आरोप लगे थे कि ये विज्ञापन ‘नस्लीय’ होने के अलावा बच्चों की गुलामी को बढ़ावा देता है। इस विज्ञापन में आभूषणों से लदी ऐश्वर्या राय के पीछे एक दुबले-पतले सांवले रंग के बच्चे को लाल रंग की छतरी उठाए हुए दिखाया गया था। सामाजिक कार्यकर्ताओं के एक ग्रुप ने ऐश्वर्या को लिखे पत्र में इस तस्वीर को ‘बेहद आपत्तिजनक’ बताया था। विज्ञापन पर मचे बवाल के बाद कल्याण ज्वैलर्स ने अपने फेसबुक पेज पर माफीनामा जारी किया था।

थम्सअप
विवादः मई, 2015 में बोतल पर नहीं प्रिंट थी फ्लेवर की जानकारी। सैंपल ब्रांडिंग में फेल
क्या था मामला
एमपी में गुना के खाद्य एवं औषधि विभाग ने थम्सअप के सैंपल लेकर उसे जांच के लिए भोपाल की सरकारी लैब में भेजा था। जांच में सामने आया कि थम्सअप ने अपनी बोतल पर फ्लेवर की जानकारी प्रिंट नहीं की है। ग्राहकों को नहीं पता कि वह थम्सअप के रूप में क्या पी रहे हैं। इसके बाद खाद्य एवं औषधि विभाग ने बॉलीवुड कलाकार सलमान खान, अक्षय कुमार और साउथ इंडियन फिल्म इंडस्ट्री के हीरो महेश बाबू को नोटिस थमाया था।

हिमामी फेयर एंड हैंडसम क्रीम
 विवादः 2013 में इस विज्ञापन में शाहरुख मर्दों को गोरा करने की क्रीम के फायदे गिनाते नजर आए थे। इसके बाद शाहरुख पर रंगभेद का आरोप लगा था।
क्या था मामला
लगभग दो साल पहले शाहरुख खान ने एक फेयरनेस क्रीम का विज्ञापन किया था, जिसपर विवाद खड़ा हो गया था। शाहरुख इस विज्ञापन में मर्दों को गोरा करने की क्रीम के फायदे गिनाते हुए नजर आते थे। इस विज्ञापन के खिलाफ एक ऑनलाइन कैंपेन ‘डार्क एंड ब्यूटीफुल’ शुरू हो गया था। इसके बाद आमिर खान समेत कई बॉलीवुड सितारों ने यह निर्णय लिया कि वे ऐसे किसी प्रोडक्ट का विज्ञापन नहीं करेंगे जो ऐसे भ्रम फैलाती है। हालांकि, शाहरुख खान ने इस विवादित मुद्दे पर चुप रहने में ही समझदारी समझी।

लिवाइस
विवादः 2009 में रैंप शो में प्रचार के लिए अश्लील हरकत का आरोप
क्या था मामला
साल 2009 में खिलाड़ी अक्षय कुमार तब विवादों में घिर गए थे, जब वह फैशन वीक के दौरान रैंप पर उतरे थे। अक्षय कुमार इस रैंप शो में एक जींस के ब्रांड के लिए उतरे थे। इस दौरान अक्षय ने अपनी पत्नी टि्वंकल खन्ना से पैंट का बटन खोलने के लिए कहा और उन्होंने ऐसा किया भी। कई लोगों ने अक्षय और टि्वंकल की इस हरकत को अश्लील बताया। कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने तो अक्षय के खिलाफ अश्लीलता फैलाने का केस भी दर्ज करा दिया था। हालांकि, विवाद बढ़ने के बावजूद अक्षय ने इस पर माफी मांगने से इनकार कर दिया था।


मैगी
 विवादः मैगी में लेड की मात्रा तय मानक से ज्यादा पाई गई।
कबः जून, 2015
 क्या था मामला
खाद्य एवं रसद विभाग ने यूपी के बाराबंकी जिले से मैगी के 12 अलग-अलग सैंपल लिए। फिर इन्हें केंद्र सरकार की कोलकाता स्थित लैब में टेस्ट कराया गया। रिपोर्ट में मैगी के पैकेटों में लेड की मात्रा 17.2 पार्ट्स प्रति मिलियन (पीपीएम) पाई गई है, यह स्‍वीकार्य सीमा से लगभग सात गुना ज्‍यादा थी। इसके बाद मैगी को भारत में बैन कर दिया। इसके बाद मैगी का विज्ञापन करने वाले अमिताभ बच्चन, प्रिटी जिंटा और माधुरी दीक्षित के खिलाफ कोर्ट ने नोटिस भेजा।




मैनफोर्स
विवाद ः हाल ही में एक नेता ने सनी लियोनी के मैनफोर्स विज्ञापन पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि इस वजह से बलात्कार करने के लिए प्रेरित किया जाता है। इस विवाद के बाद मैनफोर्स कंपनी को विज्ञापन की स्क्रिप्ट बदलनी पड़ी। हालांकि अभी भी इस कंपनी की ब्रांड एंबेस्डर सनी लियोनी हैं।

यह भी हैं
-  इसी तरह मधु सप्रे और मॉडल व एक्टर मिलिंद सोमन का 1995 में आया एक शूज का विज्ञापन अब तक का सबसे विवादित विज्ञापन माना जाता है। विज्ञापन के रिलीज होते हुए इस पर प्रति‍बंध लगा दिया गया था। इस विज्ञापन में दोनों ने सिर्फ जूते ही पहन रखे थे और उनके शरीर पर एक पॉलथीन लिपटा हुआ था। इस विज्ञापन के बाद इन दोनों को तरह के कानूनी नोटिस का सामना करना पड़ा था।

- बिपाशा बसु एवं मॉडल व अभिनेता डिनो मोरिया ने मिलकर 1998 में एक कामुक विज्ञापन किया था जो विवादों में घिर गया था। अंडरवियर के इस विज्ञापन को लेकर लंबे समय तक विवाद जारी रहा था।

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वह चेहरे जिन्हें विज्ञापन
ने दिलाई खास पहचान

विज्ञापन की वजह से अगर सितारों का स्टारडम खतरे में आता है तो यही विज्ञापन कुछ आम लोगों को स्टार भी बना देते हैं। ऐसे ही कुछ चेहरे हैं जिन्हें सेलिब्रेटी बनाने में विज्ञापन ने अहम भूमिका निभाई है।

साशा क्षेत्री
आपने एयरटेल का 4 जी वाला विज्ञापन तो देखा ही होगा। उसमें दिखने वाली लीड ऐक्ट्रेस का नाम साशा क्षेत्री है। एयरटेल के इस कैंपेन ने उन्हें स्टार बना दिया है। सोशल मीडिया पर उनके चर्चे हैं। कभी साशा के नाम के जोक्स बनते हैं तो कभी उनकी खूबसूरती की तारीफ होती है। ट्विटर पर आए दिन साशा ट्रेंड करती रह‌ती हैं। ब्रॉडकास्ट ऑडिएंस रिसर्च काउंसिल इंडिया (बीएआरसी) के मुताबिक 19 सितंबर से 20 नवंबर 2015 तक साशा पर फिल्माया गया एयरटेल 4 जी का विज्ञापन 54,406 बार दिखाया गया, यानी कुल 17,08,586 सेकेंड के लिए इस विज्ञापन को लोगों ने देखा। इसका मतलब निकलता है कि वह टीवी पर करीब 475 घंटों के लिए थीं। यू-ट्यूब और अन्य सोशल साइट्स पर भी इस विज्ञापन को खूब देखा और शेयर किया जा रहा है। खबर तो यह भी है कि साशा जल्द ही एक डांसिंग शो को होस्ट करने वाली हैं।

विशाल मल्होत्रा
क्रिकेट वर्ल्ड कप 2015 के दौरान मौका-मौका विज्ञापन ने धूम मचा दी थी लेकिन ये सिर्फ भारतीय टीम के लिए नहीं बल्कि विशाल के लिए एक सुनहरे मौके जैसा था। भारतीय टीम तो वर्ल्ड कप से बाहर हो गई लेकिन विशाल ने इस मौके को दोनों हाथों से पकड़ा और इस विज्ञापन ने उन्हें रातों रात स्टार बना दिया। दिल्ली के रहने वाले विशाल ने एमिटी से सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है, लेकिन इस विज्ञापन के हिट होने के बाद अब वह एक्टिंग की तरफ ही ध्यान दे रहे हैं। क्रिकेट के बड़े टूर्नामेंटों में और खासकर पाकिस्तान के खिलाफ मैच के दौरीन विशाल का मौका - मौका विज्ञापन जरूर चर्चा में रहता है।

करन लुनेल
20वें दशक में लिरिल साबुन बड़ा ब्रैंड बन कर सामने आया, जिसमें सबसे बड़ा हाथ रहा करन लुनेल का। लिरिल के विज्ञापन में टू-पीस पहने झरने में नहाती लड़की ने जैसे विज्ञापन दुनिया में आग लगा दी थी। रातों रात लिरिल की सेल कई गुना बढ़ गई थी। खास बात यह है कि 47 सेकेंड का यह विज्ञापन  उस साल रिलीज हुआ ‌जब फिल्म शोले की धूम थी। 2009 में जब लुनेल की मौत की अफवाह उड़ी तब उनके विज्ञापन को एक बार फिर यू-ट्यूब पर लाखों लोगों ने देखा।  इस विज्ञापन के बाद भी इस कंपनी ने कई बार ऐसे विज्ञापन बनाए लेकिन उसमें दिखाई गई मॉडल्स करन को टक्कर नहीं दे पाईं। एक बार फिरर हिंदुस्तान यूनीलिवर ने लिरिल साबुन को लॉन्च करने के लिए इसी हॉट ऐड को चुना ।

कविता चौधरी
सर्फ में ललिता जी का किरदार निभाने वाली उस महिला को कौन भूल सकता है। बड़ी-बड़ी ऐड एजेंसियां मानती हैं कि सर्फ डिटरजेंट को घर-घर पहुंचाने में एक्ट्रेस ललिता जी का बहुत बड़ा रोल रहा है। इस ऐड ने ललिता जी यानी कविता चौधरी को भारत में फेमस कर दिया था। इससे पहले ललिताजी की पहचान टीवी सीरियल उड़ान के आईपीएस ऑफिसर के रूप में होती थी। हालांकि, उन्होंने 1970 से 80 के दशक में बॉलीवुड की कई फिल्मों में काम किया। विज्ञापन एजेंसी लिंटास के मुताबिक इस ऐड ने बहुत ही कॉमन फेस वाली भारतीय महिला 'ललिता जी' को फेमस बना दिया। इस तरह सर्फ भी एक ब्रांड बन गया।

नीरू देशपांडे
विज्ञापन से बने स्टार्स की बात हो और ऐसे में पार्ले-जी बिस्कुट की बात न हो, ये कैसे हो सकता है। देश की सबसे ज्यादा बिकने वाले इस बिस्कुट के पैकेट पर बनी बच्ची का नाम है नीरू देशपांडे। जब इस पैक को डिज़ाईन किया गया था तब नीरू की उम्र चार साल थी और आज वह 60 साल की हैं। कई लोग मानते हैं कि नीरू की इस तस्वीर ने पार्ले-जी को एक ब्रैंड बना दिया है।  यह बिस्कुट 1939 से बनना शुरू हुआ था। तब इसका नाम ग्लूको बिस्किट था। अपना पल्लू संभालती एक औरत इसके पैकेट में बनीं थी। लेकिन आजादी के बाद इस बिस्कुट ने अपना रूप बदला। सन 1947 को एक बच्ची यानी नीरू देशपांडे की फोटो इसमें डाली गई है।

यामी गौतम
फेयर एंड लवली के विज्ञापन से यामी गौतम की जिंदगी बदल गई। इस विज्ञापन में इनकी खूबसूरती का ऐसा जादू चला कि बॉलीवुड तक का सफर इन्होंने तय कर लिया। आज ये एक स्टार हैं और कई जवां दिलों की धड़कन. आज भी यामी को आप इस विज्ञापन में देख सकते हैं। यामी गौतम की पहचान अब फिल्म विक्की डोनर से भी है । उन्होंने हाल ही में फिल्म सनम रे में भी मुख्य भूमिका निभाई।

सैयामी खेर
मॉडलिंग में अपनी खूबसूरती का लोहा मनवाने के बाद सैयामी ने विज्ञापन की दुनिया में कदम रखा, जहां उन्हें लेविस, पैंतलुस, लोरेल जैसे बड़े ब्रैंड के साथ काम किया और आज उन्हें राकेश ओमप्रकाश मेहरा की आने वाली फिल्म मिर्जया में लीड रोल मिला है।

राणा प्रताप और गोल्डी दुग्गल
जय-वीरू,  चाचा चौधरी-साबू,  मोदी-शाह से ज्यादा अगर कोई जोड़ी टेलीविजन स्क्रीन पर फेमस हुई है, तो वह हैं फाइव स्टार वाले रमेश-सुरेश। और शायद आपको एहसास भी नहीं हुआ होगा, लेकिन ये जोड़ी पिछले 11 सालों से फाइव स्टार के विज्ञापन कर रही है।  जहां राणा थिएटर आर्टिस्ट हैं, वहीं गोल्डी डायरेक्टर बनना चाहते हैं और कई फिल्मों में बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर काम कर चुके हैं।  फाइव स्‍टार के  विज्ञापन ने इन दोनों को खास बना दिया।  एक बार वॉचमैन ने इन दोनों को कैडबरी के ऑफिस में नहीं घुसने दिया था लेकिन जब अपना विग और मेकअप कर के वो वापस आए तो वो वॉचमैन भी उसी लाइन में खड़ा था, जिन्हें रमेश और सुरेश का ऑटोग्राफ चाहिए था। राणा और गोल्डी को अब उनके ही शहर में लोग रमेश और सुरेश के नाम से बुलाया और पहचाना जाने लगा है। जब भी इनका अपने शहर और घर आना होता है हर ओर इनकी चर्चा रमेश और सुरेश नाम से ही होती है। 

Sunday, 17 April 2016

अपने सीवान से डरता हूं!

 
मैं यह अनुमान लगा सकता हूं कि आगामी चुनाव में अमेरिका का राष्ट्रपति कौन होगा।  मैं यह भविष्यवाणी भी कर सकता हूं कि बंगाल, असम, केरल और त‌मिलनाडु में किसकी सरकार बनेगी। यह मेरा घमंड नहीं है, शायद पत्रकारिता से जुड़ाव का नतीजा ह‌ै। दरअसल, पत्रकारिता की दुनिया अनुमान और सूत्रों पर टिकी है। लेकिन जब अपनी जन्मभूमि सीवान के बारे में मुझसे कोई पूछता है तो मेरी सारी सोच धरी की धरी रह जाती है। सारे अनुमान द्यता हो जाते हैं। मैं पिछले कुछ सालों से सीवान से बाहर हूं । जाहिर है वहां कि राजनीतिक समझ भी कमजोर हो चली है और हां, मैंने भी कभी दिलचस्पी नहीं रखी। बस यही जानता था कि सांसद ओमप्रकाश यादव हैं तो विधायक व्यासदेव प्रसाद हैं। यह भी जानता था कि वह रामराज्य मोड़ वाला फ्लाइओवर भी अब 'चालू' हो गया है लेकिन यह अपने जिले को जानने के लिए पर्याप्त नहीं है।  लेकिन हां, सीवान में पिछले कुछ समय से जो माहौल बन या बिगड़ रहा है , उसने एक बार फिर से अपने गृह जिले में दिलचस्पी बढ़ा दी है। यह दिलचस्पी डर और दबाव की है। अब अपने परिवार से हर दिन फोन कर कुशल छेम पूछने का मन करता है। पहले ऐसा कुछ नहीं था। पहले दो - चार दिन भी घरवालों से बात नहीं करता था तब भी एक तसल्ली सी थी।  जब भी मैं परिवार के प्रति आश्वस्त होता था तो उसकी नींव में पूर्व सांसद शहाबुद्दीन की क्रूरता दबी मिलती थी। लेकिन अब आश्वस्त होने की यह नींव हिल चुकी है। यह सब कब से हुआ, यह बताऊंगा तब आप तुरंत किसी न किसी पार्टी और धर्म के चश्में से देख लेंगे। लेकिन हां यह तब से हुआ है जब सीवान जेल में शहाबुद्दीन से राज्य सरकार का मंत्री मिलने जला गया। शहाबुद्दीन को राज्य की सबसे बड़ी पार्टी राजद की कार्यकारणी में शामिल कर लिया गया। वर्तमान में एक अपराधी को पार्टी में रखने और मिलने जाने में बुराई कुछ नहीं है लेकिन शर्त हो कि वह देशद्रोह के केस में अंदर न हो। पिछले दिनों सीवान के दंगे में वह भीड़ कहां से निकली थी ? उसका मकसद क्या था और उस मोहल्ले का इतिहास क्या है? उस भीड़ का हीरो कौन था? उस भीड़ का निशाना रामनवमी ही क्यों था?  ऐसे तमाम सवाल हैं जिनके जवाब मैं नहीं जानता लेकिन यह जानता हूं कि यह वही सीवान है जो शहाबुद्दीन के पर कतरने पर शांत था और अब फिर से जल पड़ा है। तो क्या युवाओं को किस तरफ जाना चाहिए, इसका निर्धारण अब फिर से वही साहब करेंगे। यह आग बहुत ही खतरनाक है। इस डर के आग में हमारा बचपन झुलसा है, कमोबेश युवा होते - होते भी उस शख्स के नाम से भय था। ..अब सच में अपने सीवान से डरता हूं। 

Sunday, 3 April 2016

ग्लैमर की चमक के पीछे स्याह अंधेरा



‘यहां तो लोग रोने तक के लिए कंधा नहीं देते, मरने का इंतजार करते हैं’कहने को यह  मधुर भंडारकर की फिल्म ‘कैलेंडर गर्ल्स’ का  एक डायलॉग भर है। मगर सच यह है कि यह बॉलीवुड के चमकदार चेहरे से एक झटके में नकाब उतार देता है। प्रत्यूषा की मौत भी इसी अंधेरे पक्ष का एक हिस्सा है।


‘अकेलापन एक बहुत बड़ी परेशानी है। आप पार्टियों में जाकर कुछ देर अपना मन बहला जरूर सकते हैं लेकिन उसके बाद रह जाता है अकेलापन। शायद यही वह जिंदगी है जिसे मैंने चुना है ।’ 2003 में पूर्व मिस इंडिया और एम टीवी की मशहूर वीजे नफीसा जोसेफ ने एक अंग्रेजी समाचार को दिए इंटरव्यू में यह बात कही थी लेकिन करीब एक साल बाद वह इसी अकेलेपन के हाथों हार गईं और 29 जुलाई 2004 को मुंबई स्थित अपने फ्लैट में फांसी लगा ली। दरअसल, नाम, पैसा और शोहरत का ऐसा कॉकटेल है जिससे रातों रात आपकी दुनिया बदल जाती है। अगर आप इस चकाचौंध भरी दुनिया में खुद को संभालने में सफल हो गए तो जिंदगी भर अपने सपनों की दुनिया को हकीकत में बदल सकते हैं। मगर ये दुनिया जितनी रंगीन दिखाई देती है, हकीकत में इसका दूसरा पक्ष भी है जिसके बारे में बहुत कम ही लोग जानते हैं। ये ग्लैमर वाकई में इतना क्रूर होता है जो इंसान से उसके जीने की इच्छा तक छीन लेता है। शायद इनकी जिंदगी में फिल्मों की कहानियों की तरह वक्त करवट लेता होगा। फिल्मों की तरह खूबसूरत अंत के आने का इंतजार करने की ताकत शायद चकाचौंध में घुल चुकी होती है। इसलिए मां-बाप दोस्तों और ना जाने कितने अपनों को बिलखता छोड़ जाने का ख्याल भी उन्हें मरने से नहीं रोक पाता। संघर्ष, चकाचौंध, कामयाबी, प्यार, और फिर खुदखुशी... ये लफ्ज सिर्फ प्रत्यूषा बनर्जी या नफीसा जोसेफ की जिंदगी की ही दास्तां नहीं कहते।  ग्लैमर की इस दुनिया में ऐसे तमाम उदाहरण मिल जाएंगे जिन्होंने सफलता की ऊचांईयों पर जाने के लिए बहुत मेहनत की लेकिन फिर अचानक हार मान गए। दरअसल, फिल्मी दुनिया में कामयाबी के आसमान पर पहुंच चुके और पहुंचने की ख्वाहिश रखने वाले जब नाकामी से दो-चार होते हैं तो उनका संभलना आसान नहीं होता। यह नाकामी फिल्मी कैरियर की भी हो सकती है, इश्क की भी। इश्क में नाकाम होकर कई फनकारों ने अपनी जिंदगी गवाई तो गुमनामी के अंधेरों में खो जाने का खौफ और मायूसी का शिकार होकर कई अदाकाराओं ने अपनी जान दे दी।  लड़कियां चूंकि ज्यादा संवेदनशील और जज्बाती होती हैं लिहाजा कैरियर और इश्क की नाकामी का दबाव बर्दाश्त नहीं कर पाती और मौत को गले लगा लेती हैं। प्रत्यूषा बनर्जी भी ऐसी ही एक अदाकारा थीं जो कैरियर और इश्क में उतार चढ़ाव को बर्दाश्त नहीं कर सकीं और शुक्रवार को महज 24 बरस की उम्र में खुदकुशी करके अपनी जान दे दी। आखिरी समय में प्रत्यूषा किस कदर अकेली थीं यह उनके व्हाट्सअप स्टेटस ' मर कर भी मुंह न मोड़ना'  से बयां होता है। यहां यह सवाल मौजूं हो जाता है कि  क्या ग्लैमर की दुनिया सच में इतनी क्रूर है कि यहां किसी को किसी दूसरे के दर्द को सुनने के लिए वक्त नहीं है ? तो क्या सच में यहां लोग रोने तक के लिए कंधा नहीं देते बल्कि मरने का इंतजार करते हैं? क्या यहां लड़कियों को इस्तेमाल किया जाता है और फिर 'फेंक' दिया जाता है ? फिल्मी दुनिया में रिश्ते जरूरत के हिसाब से बनाए जाते हैं और जब जरूरत खत्म हो तो रिश्ते भी खत्म हो जाते हैं। कुछ लड़कियां इस हकीकत को समझ लेती हैं और उन्हीं रिश्तों का इस्तेमाल करके अपना कैरियर बना लेती है लेकिन कुछ लड़कियां इस हकीकत को बर्दाश्त नहीं कर पाती और अपनी जान दे देती हैं।  परवीन बॉबी जब एकाएक देश छोड़कर चली गई थीं, तो हेमा मालिनी ने बहुत दुखी होते हुए कहा था कि ‘मुझे यहां सब कुछ चांदी की प्लेट में सजा हुआ मिला, मगर सबके साथ ऐसा नहीं है। परवीन को यहां जबर्दस्त शोषण और एकांत के दौर से गुजरना पड़ा।’ परवीन के पागल होने का एक बड़ा कारण उनका अति संवेदनशील होना माना जाता है। उनकी मौत भी बेहद दुखद थी। गुजरे जमाने की हीरोइन रीना राय का कहना था कि ‘ऐसा नहीं है कि मैंने कोई समझौते नहीं किए, लेकिन आजकल की लड़कियों को देखती हूं तो उल्टी आती है।’ दरअसल, रीना राय का इशारा ऐसे एकांत अंधेरे की ओर था जहां सपनों को तोड़ दिया जाता है। जानकारों का मानना है कि ग्लैमर की दुनिया में आने के बाद लड़कियों को असुरक्षा और धोखे का डर ज्यादा सताता है। धोखा रवीना टंडन जैसी अभिनेत्रियों को मिल चुका है, और वो भी अक्षय कुमार जैसे बड़े सितारे से। अक्षय के लिए किसी दौर में पागल हो चुकीं रवीना ने एक मैग्जीन को दिए इंटरव्यू में बताया था कि उन्होंने अक्षय को सुष्मिता और रेखा के साथ रंगों हाथ पकड़ा था। रवीना ने अक्षय पर यहां तक आरोप लगाया कि वो लड़कियों को फंसाने के लिए नाटक करते हैं। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि उनसे सगाई के दौरान भी दो और लड़किय़ों से सगाई कर चुके थे। रवीना ने सालों तक अक्षय पर भड़ास निकाला, लेकिन अक्षय खामोश रहे और इस तरह एक प्रेम कहानी का दर्दनाक अंत हुआ। फिल्म तारे जमीं पर में काम कर चुकीं टिस्का चोपड़ा ने अपनी किताब ऐक्टिंग स्मार्ट’ में लिखा है कि यह सीधे मांग और पूर्ति का मामला है। यहां ऐक्टिंग की चाह रखने वालों की भारी भीड़ है लेकिन काम बहुत कम है। इसीलिए लड़कियों को हर तरह के शोषण से दो-चार होना पड़ता है। अब तो लड़के भी इससे नहीं बचे हैं। हालांकि किताब में उन्होंने इससे बचने के तरीके भी बताए हैं।





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इस इंडस्ट्री में जो शिखर पर है लोग उसी को पूछते हैं और जो चला गया,उसका नाम लेनेवाला कोई नहीं। ऐसा ही कई स्टार्स के साथ हुआ जो अपने समय में ग्लैमर इंडस्ट्री में जबरदस्त फेमस थे, उनके पास नाम और पैसा सब कुछ था मगर अचानक कुछ ऎसा हुआ कि अकेलेपन और गम की वजह से ही मर गए।


जिया खान
25 साल की कामयाब एक्ट्रेस जिया खान ने सूरज पंचोली के साथ अपने संबंध खराब होने के कारण तीन जून, 2013 को खुदकुशी कर ली।  जिया खान बड़े सपनों के साथ सात समंदर पार से मुंबई आई थीं। उन्होंने 2007 में फिल्म निशब्द से फिल्मी कैरियर की शुरुआत की और बाद में फिल्म गजनी और हाउसफुल जैसी फिल्मों में काम किया। जिया का जन्म अमेरिका में हुआ था और परवरिश लंदन में। बहुत कम लोग ही जानते होंगे कि जिया एक ट्रेंड सिंगर और डांसर भी थीं। जिया हवा के हल्के झोंके की तरह आईं और फिजा में अपनी खुशबू बिखेर कर चली गईं।

दिव्या भारती
19 साल की दिव्या भारती की मौत मुंबई में उनकी पांच मंजिला इमारत से गिरने की वजह से हुई। हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में दिव्या भारती को एक ऐसी अभिनेत्री के तौर पर याद किया जाता है जिन्होंने अपनी रूमानी अदाओं से दर्शकों के बीच खासी पहचान बनाई।  वर्ष 1992 से वर्ष 1993 के बीच दिव्या भारती ने बॉलीवुड की 14 फिल्मों में काम किया जो आज भी न्यू कमर अभिनेत्री के लिए एक रिकार्ड है। वर्ष 1992  में दिव्या भारती ने जानेमाने फिल्मकार साजिद नाडियाडवाला के साथ शादी कर ली लेकिन शादी के महज एक वर्ष के बाद 05 अप्रैल 1993 को दिव्या भारती की बिल्डिंग से गिरकर मौत हो गई। 90 के दशक की इस एक्ट्रेस की मौत आज भी एक पहेली है।  सात समंदर पार .. ऐसी दिवानगी देखी नहीं ..जैसे गानों के जरिए वह आज भी लोगों के दिलों पर राज करती हैं।

परवीन बॉबी
इस ग्लैमरस अभिनेत्री का अंत वाकई बहुत दुखद रहा। अपने समय की प्रतिभाशाली और लोकप्रिय अभिनेत्रियों में से एक परवीन बाबी अपने आखिरी समय में बिलकुल अकेली और तन्हा रह गई थीं। जुहू, मुंबई में रहने वाली परवीन बाबी 20 जनवरी, 2005 को 55 वर्ष की उम्र में इस दुनियां से अलविदा कह गईं। लेकिन उनकी मौत का पता पांच दिन बाद चला। शराब और नशे की आदी परवीन बाबी की मौत एक हादसा थी या आत्महत्या किसी को इस बात की खबर नहीं हुई।

मधुबाला
बॉलीवुड  की सबसे खूबसूरत अभिनेत्रियों में से एक मधुबाला की दास्तां भी बहुत अजीब और कष्टदाई रही। जब तक फिल्मों में काम करती रहीं तब तक तो उनके चाहने वालों और बॉलीवुड ने उन्हें सर-आंखों पर रखा लेकिन जब उनके शरीर ने काम करना बंद कर दिया और वह बिस्तर से हिल भी नहीं पाती थीं तब सभी ने उनका साथ छोड़ दिया। अकेलेपन से जूझ रहीं मधुबाला ने 23 फरवरी, 1969 को 36 साल की उम्र में अपने प्राण त्याग दिए।

मीना कुमारी
31 मार्च 1972 को बॉलीवुड की सबसे लोकप्रिय ट्रैजेडी क्वीन मीना कुमारी की सांसें थम गईं। अकेलेपन की वजह से मीना कुमारी ने भी शराब और नशे से दोस्ती कर ली थी। बार-बार दिल टूटने और धोखा मिलने के कारण मीना कुमारी उदास रहने लगी थीं। मीना कुमारी का निधन उस समय हुआ जब उनकी सुपरहिट फिल्म पाकीजा सिनेमा हॉल में दर्शकों की भीड़ जुटा रही थी। उन्हें यह देखने का भी अवसर नहीं मिला कि उनके फैंस उन्हें कितना चाहते हैं।

सिल्क स्मिता
35 साल की साउथ एक्‍ट्रेस सिल्क स्मिता 23 सितंबर 1996 को चेन्नई में अपने घर में मृत पाई गई।  ऐसा कहा जाता है कि सिल्क अपने जीवन से इतना निराश हो गईं थीं कि उन्होंने आत्महत्या कर ली। सिल्क के बारे में कहा जाता है कि उनकी लोकप्रियता उन्हें ले डूबी। उनकी छवि एक सेक्स सायरन की बन चुकी थी।  मीडिया में उनके बारे में भद्दी बातें लिखी जा रहीं थी और राह चलते लोग उन्हें गंदे इशारे किया करते थे।  ये सब उनसे बर्दाश्त नहीं हुआ। सिल्क स्मिता पर फिल्म डर्टी पिक्चर बनी। इस फिल्म में विद्या बालन ने स्लिक स्मिता की भूमिका निभाई।

विवेका बाबाजी
कामसूत्र कॉन्डम ऐड के लिए प्रसिद्ध हुईं विवेका ने 2010 में अपने बांद्रा स्थित फ्लैट में पंखे से लटककर सूइसाइड कर ली।

कुलजीत रंधावा
टीवी ऐक्ट्रेस और मॉडल कुलजीत रंधावा ने 8 फरवरी 2006 को जुहू स्थित अपने फ्लैट पर सूइसाइड कर ली।

नफीसा जोसेफ
पूर्व मिस इंडिया और एम टीवी की मशहूर वीजे नफीसा जोसेफ वर्सोवा स्थित अपने फ्लैट पर मृत पाई गई थीं।



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काश! दीपिका की तरह लड़ना जानती प्रत्यूषा
बॉलीवुड एक्ट्रेस दीपिका पादुकोण ने 2014 में एक इंटरव्यू में यह कहकर लोगों को हैरान कर दिया था कि वो स्टारडम की ऊंचाई पाने के बाद जब वह अपने कैरियर में असफल होने लगी थीं, तब वह अवसाद की शिकार हो गई थीं। वह समझ नहीं पा रही थीं कि उनके पास गाड़ी, बंगला, ऐशो-आराम, सफल लोगों का जमावड़ा, वह सब कुछ है जिसकी आम आदमी को तमन्ना रहती है, इसके बावजूद ऐसी क्या बात है कि जो उन्हें परेशान कर रही है। इस मामले को लेकर उन्होंने मनोचिकित्सक की सलाह ली, जिसने बताया कि वह मानसिक अवसाद से ग्रस्त हो गई हैं। दीपिका के मुताबिक, लोग हैरान थे कि इतना सफल होने के बावजूद डिप्रेशन था, लेकिन लोग किसी की मेंटल हेल्थ का अंदाजा नहीं लगा पाते। दीपिका भाग्यशाली रहीं कि उनके परिवार और दोस्तों ने उन्हें इस अवसाद से बाहर आने में मदद की। दीपिका अब अवसाद को लेकर जागरूकता फैलाने के लिए खास कैंपेन भी चला रही हैं।  सबसे जरूरी चीज, उन्होंने अपनी समस्या को पहचानकर उसका सही समय पर उपचार लिया, लेकिन हर कोई उनके जैसा भाग्यशाली नहीं होता। बहुतों को तो पता ही नहीं होता कि वे अवसाद में हैं और उन्हें इलाज की जरूरत है। बढ़ते-बढ़ते ऐसे लोगों की बीमारी इतनी बड़ी हो जाती है कि बात खुदकुशी तक जा पहुंचती है। प्रत्यूषा बनर्जी ने भी छोटे पर्दे की आनंदी के रूप में बड़ा नाम कमाया। उनकी लोकप्रियता ने उन्हें बिग बॉस में भी पहुंचाया। आनंदी, नाम बड़ा जरूर था , पर प्रत्यूषा के पास अब काम नहीं था। वैसे तो वह कईं सीरियलों में नजर आ रही थीं, लेकिन लीड रोल उनके लिए खत्म होते जा रहे थे। उनकी असफलता उनकी ‌ही जिदंगी पर भारी पड़ती जा रही थी। कहते हैं कि वह ड्रग्स लेने लगी थीं। अपने बॉयफ्रेंड से भी उनके रिश्ते अच्छे नहीं रहे थे। कुल मिलाकार कहा जा सकता है कि वह भी अवसादग्रस्त हो चुकी थीं, जिसके कारण उन्होंने मौत को गले लगा लिया।  अवसाद की समस्या उन लोगों के साथ बढ़ जाती है, जो इसे समझने और डॉक्टरी सलाह लेने के बजाय इसे छुपाकर अंदर-ही-अंदर घुटते रहते हैं। उन्हें लगता है कि डॉक्टरी सलाह लेने पर कोई उन्हें पागल न कहने लगे। सही समय पर डॉक्टरी सलाह लेने पर कई जिंदगियों को बचाया जा सकता है।




सुरक्षित भविष्य के लिए
एक्ट्रेस को भाते हैं उद्योगपति
ग्लैमर की दुनिया में पैसा बहुत अहमियत रखता है। अक्सर जब सितारों का कैरियर ढलान पर होता है, तब पैसे की तंगी के चलते वे हताशा के शिकार होते हैं। खासकर अभिनेत्रियों की बात करें तो  उनका सिने कैरियर छोटा और बेहद उतार-चढ़ाव भरा होता है। इसलिए जब बात शादी की आती है तो उन्हें मशहूर बिजनेस टाइकून पसंद आते हैं। धनवान व्यक्ति से शादी करके वे अपना आने वाला कल सुरक्षित कर लेती हैं। बॉलीवुड में ऐसी कईं अभिनेत्रियां हैं, जिन्होंने उद्योगपतियों का हाथ थामा। गुजरे जमाने में करोड़ों दिलों की धड़कन रहीं मुमताज का नाम दारा सिंह, शम्मी कपूर, जितेंद्र के अलावा राजेश खन्ना के साथ भी जुड़ा, जो उनसे शादी करना चाहते थे। लेकिन मुमताज ने विदेश में बसे भारतीय उद्योगपति मयूर माधवानी से शादी की। टीना मुनीम ने उद्योगपति अनिल अंबानी का दामन थामा। जबकी टीना के राजेश खन्ना के साथ कई सालों तक अफेयर के खूब चर्चे रहे, दोनों लिव इन में भी रहे। जूही चावला ने भारतीय मूल के ब्रिटिश बिजनेसमैन जय मेहता से अचानक शादी करने का खुलासा कर सबको हैरान कर दिया था। बिग ब्रदर की विजेता बनने के बाद शिल्पा शेट्टी ने ब्रिटिश भारतीय व्यवसायी राज कुंद्रा से शादी की। कभी अक्षय कुमार से इश्क लड़ाने वाली रवीना टंडन ने बिजनेसमैन अनिल थंडानी को अपना हमसफर बनाया। अभिषेक बच्चन से अपनी सगाई तोड़कर करिश्मा कपूर ने दिल्ली के उद्योगपति संजय कपूर से नाता जोड़ा था। हेमा मालिनी और धर्मेंद्र की लाडली ऐशा देओल ने फिल्मी पारी के असफल रहने पर उद्योगपति भरत तखलानी संग सात फेरे लिए। आयशा टाकिया ने भी अपने कैरियर में जब कोई मुकाम नहीं पाया तो होटल मालिक फरहान आजमी को अपना बना लिया। विद्या बालन ने यू टीवी मोशन पिक्चर्स के सीईओ सिद्धार्थ रॉय कपूर के साथ शादी की। रानी मुखर्जी ने बॉलीवुड के सबसे बड़े बैनर के मालिक यशराज चोपड़ा के बेटे आदित्य चोपड़ा के साथ ब्याह रचाया। हाल ही में असिन माइक्रोमैक्‍स के को-फाउंडर राहुल शर्मा के साथ विवाह बंधन में बंधीं। रेखा और अमिताभ के प्यार की दास्तां से सभी वाकिफ हैं। लेकिन अचानक ही दोनों ने अपने रास्ते बदल लिए और रेखा ने भी 1990 में उद्योगपति मुकेश अग्रवाल से शादी की। लेकिन विडंबना रही कि मुकेश ने एक साल बाद ही खुदकुशी कर ली।






Sunday, 27 March 2016

तो सचिन से भी आगे निकल जायंगे विराट कोहली...


 वह एक दौर था जब सचिन तेंदुलकर क्रिकेट मैदान पर हों तो जीत तय मानी जाती थी लेकिन जीत के करीब लाकर आउट हों तो उन्हें गाली भी तय मानी जाती थी। दौर बदला, सचिन ने क्रिकेट को अलविदा कहा और शुरू हुई एक और सचिन की तलाश। अब वह तलाश विराट कोहली पर खत्म होती दिख रही है...

वह दिल्ली का बाशिंदा है, वह आक्रामकता और परफॉर्मेंस का अनूठा संगम है और उसे चुनौतियां का मुकाबला करना पसंद है। वह दबाव में बिखरता नहीं बल्कि निखर कर सामने आता है। उसमें द्रविड़ जैसा धैर्य है तो आक्रामकता सहवाग सी है। उसका खेल सचिन जैसा नैसर्गिक है और वह गांगुली की तरह आगे बढ़कर लीड करना जानता है। वह सिर्फ बल्ले से ही विपक्षी को जवाब नहीं देता है बल्कि अपने गुस्से से भी सबकी बोलती बंद कर देता है। वह भारत का टेस्ट टीम कप्तान है और उसके पास वह सब कुछ है जो एक 27 वर्षीय युवक केवल कल्पना ही कर सकता है। इतना सब हासिल करने के बावजूद खेल के प्रति उसकी लगन देखने लायक है। वह और कोई नहीं, विराट कोहली है। वह भारत की रन मशीन है। वह करोड़ों भारतीयों का विराट है।  विराट कोहली, यह शख्स पिछले कुछ सालों से क्रिकेट के मैदान में इस कदर छाया है कि अब उसके तूफान में ‘क्रिकेट के भगवान’ सचिन तेंदुलकर के रिकॉर्ड भी उड़ने या यूं कहें टूटने लगे हैं। तो क्या यह मान लिया जाए कि विराट कोहली क्रिकेट की दुनिया के नए सचिन तेंदुलकर हैं? शायद यह कहना जल्दबाजी या अतिशयोक्ति होगी लेकिन विश्वकप 2011 के फाइनल के बाद हुए जश्न में जिन लोगों ने विराट कोहली को देखा होगा, उन्हें याद होगा कि विराट ने सचिन को अपने कंधों पर बैठा लिया था। दरअसल, वह विराट का एक संकेत था।  उसमें कहीं न कहीं यह बात छिपी हुई थी कि अब आगे सचिन जैसे महान खिलाड़ी की विरासत को कंधों पर रख आगे बढ़ाने के लिए वह तैयार हैं। अब क्रिकेट प्रेमी से लेकर विशेषज्ञ तक भी यह मानने लगे हैं कि विराट कोहली आने वाले कल के सचिन हो सकते हैं। हालांकि इन दोनों में कई असमानताएं हैं। दोनों की शख्सियत जुदा है तो अंदाज भी अलग है। मिजाज और खेल की शैली की भी कोई तुलना नहीं है। जहां सचिन क्रिकेट के जैंटलमैन हैं तो विराट उद्दंड खिलाड़ी । लेकिन हां, जब दोनों अपनी लय में होते हैं तो लगता है जैसे वह किसी शोएब अख्तर या फिर डेल स्टेन के सामने नहीं खेल रहे हैं बल्कि किसी गली के कमजोर गेंदबाज की गेंद को स्प्रिंग लगी बैट से सीमा रेखा के बाहर पहुंचा रहें हो। जब शेष खिलाड़ी जूझ रहे होते हैं, तब वह मानों अतिरिक्त ऊर्जा की पूंजी के साथ गेंद को अपने बल्ले के बीचोबीच महसूस करते हैं। दोनों की बल्लेबाजी में  सकारात्मक सोच, स्थिरता, संतुलन, आक्रामकता, बहुआयामी रुझान और कलात्मकता का समायोजन देखने को मिल जाता है। इसके बावजूद कुछ जानकार मानते हैं कि विराट एक मायने में सचिन से बेहतर हैं। जानकारों का कहना है कि विराट अपने साथ ‘नर्वस एनर्जी’ लेकर मैदान पर नहीं आते। वहीं यह ‘एनर्जी’ सचिन के खेल का एक अनिवार्य हिस्सा रही है। वह सचिन से ज्यादा आत्मविश्वास से लबरेज दिखते हैं। जिन लोगों ने पिछले पच्चीस सालों का क्रिकेट देखा है, वह भी इस बात को बखूबी समझते हैं। सचिन को बल्लेबाजी करते देख प्रशंसक हमेशा भय और आशंका से ग्रस्त रहते थे कि किसी भी क्षण वह गेंद को हवा में खेलेंगे और आउट हो जाऐंगे या गिल्लियां उड़ जाएंगी लेकिन कोहली के साथ एक पॉजिटिव एनर्जी खेल में आती है। हो सकता है, यह उसकी आक्रामक शख्सियत का परिणाम हो लेकिन उनका यह प्रभाव ही विपक्षी को कमजोर कर देता है। कोहली का यह आत्मविश्वास ही है कि जब 2016 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ  वनडे सीरीज के पहले मैच में कोहली छक्का मारने के चक्कर में 91 रनों पर लपके गए थे तब वसीम अकरम ने कोहली से पूछा ,  ‘ये बताइए,  आपको ऐसा शॉट मारने की क्या जरूरत थी? आप तो शतक के बेहद करीब थे, आसानी से पूरा भी कर सकते थे। इस पर कोहली का जवाब था कि आप थोड़ा इंतजार कीजिए, मैं इस सीरीज में कम से कम दो शतक जरूर लगाऊंगा और उनका चार मैचों की उस सीरीज में स्कोर था: 91, 59, 117 और 106 रन। कोहली की शख्सियत इतनी बड़ी होने लगी है कि पूर्व क्रिकेटरों को भी उनमें सचिन की छाप नजर आती है। हाल ही में ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान माइकल क्लार्क और स्टीव वॉ ने कहा था कि कोहली को देखकर उन्हें सचिन की याद आती है। कुछ क्रिकेट जानकार सचिन को एक आर्टिस्ट के रूप में देखते हैं तो कोहली को एक फाइटर मानते हैं। यह भी सच है कि शांत सचिन की शख्सियत ही ऐसी थी कि उनके भय से विपक्षियों को नींद तक नहीं आती थी। महान लेग स्पिनर शेन वार्न और तेज गेंदबाज शोएब अख्तर जैसे दिग्गज कई दफा अपने डर का किस्सा सार्वजनिक कर चुके हैं।  24 साल के कैरियर में वे लगभग विवादमुक्त रहकर क्रिकेट खेलते रहे। वह मैदान में हों या उससे बाहर, उनका प्रदर्शन और व्यवहार सबके लिए आदर्श बना रहा। मशहूर पत्रकार प्रभाष जोशी ने एक बार सचिन के बारे में कहा था, ‘देश चाहता है कि सपूत हो तो तेंदुलकर जैसा, टीम चाहती है कि खिलाड़ी हो तो सचिन जैसा, माता-पिता चाहते हैं कि बेटा हो तो तेंदुलकर जैसा, गुरु चाहते हैं कि शिष्य हो तो तेंदुलकर जैसा और अब तो बेटा-बेटी चाहते हैं कि पापा हों तो तेंदुलकर जैसे।’ बहरहाल, सचिन अब इतिहास हैं और वर्तमान दौर विराट कोहली का है। प्रशंसकों के लिए सचिन हमेशा पहला प्यार बने रहेंगे लेकिन सच यह भी है कि अगर कोहली निरंतर ऐसा विराट प्रदर्शन करते रहे तो उनसे प्यार और गाढ़ा ही होता जाएगा।

कौन है विराट : सचिन या कोहली
आधुनिक युग के क्रिकेट में जब बल्लेबाजी की बात आती है तो सचिन तेंदुलकर वह पहला नाम है जो लोगों के जेहन में आता है। सचिन के चाहने वाले इसके अलावा कुछ और सुनना ही नहीं चाहते हैं लेकिन सचिन के रिकॉर्ड और बल्लेबाजी शैली को कोई तुलना दे रहा है तो वह है विराट कोहली। चूंकि क्रिकेट में आंकड़ों का बहुत महत्व होता है इसलिए तुलना होना भी लाजमी है। ऐसी तुलनाएं कई बार मजेदार होती हैं। दोनों के बीच तुलना की बात की जाए तो विराट ने अपने पहले 41 टेस्ट मैचों की 72 पारियों में चार बार नाबाद रहते हुए 2994 रन बनाए हैं। फिलहाल विराट का उच्चतम स्कोर 169 रन है। उनका बल्लेबाजी औसत 44.02 है। इस दौरान उन्होंने 11 शतक और 12 अर्धशतक लगाए हैं। वहीं अगर सचिन की बात की जाए तो उन्होंने अपने शुरुआती 41 टेस्ट मैचों की 60 पारियों में सात बार नॉट आउट रहते हुए 2911 रन बनाए थे। शुरुआती 41 मैचों में सचिन का उच्चतम स्कोर 179 था। उनका बल्लेबाजी औसत विराट से कहीं ज्यादा 54.92 था। सचिन ने इस दौरान 10 शतक और 14 अर्धशतक जड़े थे। बात अगर वनडे की जाए तो विराट ने अभी तक खेले 171 मैचों की 163 पारियों में 23 बार नॉट आउट रहते हुए 7212 रन बनाए हैं। वनडे क्रिकेट में विराट सबसे तेजी से 7000 रन बनाने वाले बल्लेबाज भी हैं।  इस दौरान विराट का बल्लेबाजी औसत 51.51 का रहा है। उन्होंने 25 शतक और 36 अर्धशतक लगाए हैं। उनका उच्चतम स्कोर 183 रन का रहा है। वहीं सचिन ने अपने पहले 171 वनडे मैचों की 166 पारियों में 16 बार नॉट आउट रहते हुए 5828 रन बनाए थे। सचिन का उच्चतम स्कोर 137 का रहा। इस दौरान सचिन का बल्लेबाजी औसत 38.85 का रहा था। उन्होंने 12 शतक और 36 अर्धशतक बनाए थे। टी 20 में बात करें तो विराट ने 40 मैच की 37 पारियों में 10 बार नाबाद रहे हैं और 1446 रन बनाए हैं। कोहली का बल्लेबाजी औसत 53.55 का है। विराट का स्ट्राइक रेट 32.41 है। जबकि सचिन की बात करें तो उन्होंने एकमात्र टी 20 मैच खेला है। इस मैच में उन्होंने 10 रन बनाए।  यहां एक बात का ध्यान रखना जरूरी है कि जहां विराट ने अपने कैरियर में अधिकतर नंबर तीन या चार पर बल्लेबाजी की है वहीं सचिन शुरुआती 70 से ज्यादा वनडे में पांचवें या छठे नंबर पर ही बल्लेबाजी करने आते थे। इसके अलावा दो अलग युग के बल्लेबाजों में केवल रनों के आधार पर तुलना करने से पहले गेंदबाजी, मैदान, खेल के नियम व अन्य कई परिस्थितियों का भी ख्याल रखना जरूरी है।

विज्ञापन वर्ल्ड में सचिन बनाम कोहली
सचिन जिस दौर में हीरो बन रहे थे इत्तेफाक से यह वही दौर था जब देश का बाजार दुनिया के लिए खुल रहा था। अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को यहां पैठ और पहचान बनाने के लिए अपने नायकों और प्रतीकों की जरूरत थी। सचिन के रूप में उन्हें ऐसा आदर्श मिला। बाजार ने क्रिकेट को हाथों-हाथ लिया और उसे अपनी जरूरतों के हिसाब से बदला भी। क्रिकेट देश का दूसरा धर्म बन गया और सचिन इसके देवता। लेकिन आज हालात बदल गए हैं। उसी बाजार का क्रिकेट में हद से ज्यादा दखल हो गया है। नतीजा यह है कि अब बहुत-से लोग क्रिकेट को खेल की तरह नहीं बल्कि किसी तमाशे की तरह देख रहे हैं। बहुत-से लोग मानने लगे हैं कि खिलाड़ी गेंद और बल्ले से कविता रचने वाले देवता नहीं, महज पैसे के पीछे भागने वाले इंसान हैं और यहीं क्रिकेट का वह जादू टूट रहा है जो इसे जुनून और धर्म में बदलता है। यह बात सिर्फ खेल विशेषज्ञ नहीं कह रहे। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) भी इसे मानती है। 2011 में आई उसकी एक रिपोर्ट कहती है कि भारत में क्रिकेट की लोकप्रियता में लगातार गिरावट आ रही है, खासकर वनडे और टेस्ट क्रिकेट की।  ऐसे दौर में विराट ने विज्ञापन की दुनिया में अपनी पहचान बनाई है। पेप्सी, मंच, रिबॉक, नाइके, एमआरएफ सहित तमाम बड़ी कंपनियों के साथ उनका करार है। कई विज्ञापनों की कमाई में विराट ने धोनी और सचिन को शिकस्त भी दे दी है। सोशल मीडिया पर भी विराट कोहली सचिन से आगे निकल चुके हैं । उनके फॉलोअर्स सचिन से कहीं ज्यादा हैं।  फोर्ब्स पत्रिका ने विराट को भी ब्रांड के रूप में देखा है।




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अनुष्का संग रहा ‘खूबसूरत’ रिश्ता
कहते हैं कि हर कामयाब आदमी के पीछे एक औरत का हाथ होता है लेकिन जब बात हो विराट कोहली और अनुष्का शर्मा की तो मामला थोड़ा अलग हो जाता है। जब तक दोनों रिलेशनशिप में रहे विराट के हर खराब परफॉर्मेंस के लिए अनुष्का शर्मा को ही दोष दिया गया। बात चाहें 2014 में इंग्लैंड दौरे पर विराट के खराब प्रदर्शन की हो या फिर विश्वकप 2015 के सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भारत की हार की हो, गालियां अनुष्का को ही पड़ीं। बावजूद इसके अनुष्का और विराट का प्यार कम नहीं हुआ। समय - समय पर विराट अपने ‘माय लव’ को फ्लाइंग किस देकर या हाथ मेें हाथ डालकर अपने प्यार के बारे में दुनिया को बताने से पीछे भी नहीं रहे। यहां तक की उन्होंने एक पत्रकार से अनुष्का के लिए लड़ाई भी कर ली। तो अनुष्का भी आलोचनाओं की परवाह न करते हुए विराट कोहली को चीयर्स करने के लिए स्टेडियम में पहुंचती रहीं। हालांकि पिछले कुछ दिनों से विराट और अनुष्का के बीच दरार की भी खबरें आ रही हैं। इस ब्रेकअप के कई कारण बताए जा रहे हैं। ब्रेकअप की वजहों को खंगालने से पहले इस जोड़ी की प्रेम कहानी पर एक नजर जरूरी है। विराट और अनुष्का की प्रेम कहानी भी बड़ी दिलचस्प है। इन दोनों की पहली मुलाकात एक विज्ञापन की शूटिंग के दौरान हुई थी। क्रिकेट मैच के दौरान विराट बेहद गुस्सैल किस्म के इंसान लगते हैं। अनुष्का खुद फिल्मों में हैं लेकिन टीवी पर विराट को देख उनकी गुस्सैल छवि को ही विराट की असलियत मान बैठीं। शूटिंग के पहले अनुष्का को लगा कि एक अक्खड़ और तुनक मिजाज इंसान के साथ उन्हें काम करना है इसलिए उन्होंने भी जरूरत से ज्यादा ‘एटीट्यूड’ दिखाया। विज्ञापन शूट के शुरुआती दिनों में दोनों में कई बातों को लेकर असहमति रही लेकिन बाद में विराट को अनुष्का ने जैसा सोचा था उससे विपरीत पाया। अनुष्का के साथ विराट बेहद सौम्यता से पेश आए और संभव है कि विराट के इसी व्यवहार ने अनुष्का का दिल जीत लिया। फिर क्या था, इश्क परवाना चढ़ा और बात शादी तक पहुंच गई। ऐसी खबरें आती रहीं कि विराट शादी करना चाहती हैं लेकिन अनुष्का अभी कैरियर पर फोकस करना चाहते हैं। दरअसल, अनुष्का को यह बखूबी पता है कि अभिनेत्रियों का कैरियर शादी के बाद लगभग खत्म सा हो जाता है। यह भी सच है कि यशराज फिल्म्स के बैनर और शाहरुख खान जैसे सुपरस्टार के साथ अपना कैरियर आरंभ करने वाली अनुष्का अपने उम्मीदों के मुताबिक आगे नहीं गईं और नंबर वन की रेस में समकालीन अभिनेत्रियों से बहुत पीछे भी छूट गईं। वहीं कोहली का कद समय के साथ और भी विराट होता जा रहा है। संभवत: अनुष्का पर ‘मानवीय जलन’ भी हावी हो इसलिए उन्होंने शादी के प्रस्ताव को ठुकरा दिया। क्योंकि खबरें आती रहीं हैं कि कोहली की मां चाहती हैं कि उनके बेटे की शादी जल्द हो। ऐसे में अनुष्का द्वारा विराट के प्रस्ताव को झट से झटक देने से कहीं न कहीं उनके ‘इगो’ को भी चोट पहुंची है। अफवाहें यह भी हैं कि अनुष्का की फिल्म ‘बॉम्बे वेलवेट’ में विराट के 40 करोड़ रुपये लगे थे और यह फिल्म बुरी तरह पिट गई। इसके बाद विराट ने अपने पैसे अनुष्का से  मांग दिए जो उन्हें बुरा लगा और  बात ब्रेकअप तक पहुंच गई। खबर है कि फिर से अनुष्का शर्मा ने पैचअप की पहल की है।  बहरहाल , अनुष्का और विराट उस पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं जिसके लिए शादी से ज्यादा कैरियर महत्वपूर्ण है। उम्र अभी दोनों के पक्ष में हैं और शादी के पहले उन्हें बहुत कुछ पाना है, खासतौर पर अनुष्का को। फिर भी उम्मीद की जानी चाहिए कि विराट अनुष्का की लव स्टोरी का अंत सुखद होगा।  

रोमांस की एक और कहानी
हॉलीवुड एक्ट्रेस इजाबेल लीट संग भी विराट के इश्क के चर्चे रहे। इजाबेल वह एक्ट्रेस हैं जिन्होंने अपने और क्रिकेटर विराट कोहली के संबंध का खुलासा किया था।  एक पत्रकार से बातचीत में उन्होंने माना था कि वह विराट के साथ दो साल तक रिलेशनशिप में थीं। गूगल पर आज भी कई तस्वीरें मौजूद हैं जिनमें विराट और इजाबेल एक साथ नजर आ रहे हैं। विराट से उनके अफेयर की खबरों ने उस वक्त जोर पकड़ा था जब कुछ तस्वीरों में दोनों सिंगापुर की सड़कों पर एक साथ घूमते नजर आए थे। इसके अलावा इंग्लैंड की एक महिला क्रिकेटर ने भी विराट कोहली को सार्वजनिक रूप से प्रपोज किया था। महिला क्रिकेटर ने ट्विटर पर विराट को आई लव यू कहा था।
   
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पूरा नाम  :  विराट प्रेम कोहली
निकनेम : चीकू
जन्म       :  5 नवंबर 1988
जन्मस्थान  : दिल्ली
पिता       : स्व. प्रेम कोहली (वकील )
माता       :  सरोज कोहली
दाएं हाथ के बल्लेबाज
दाएं हाथ के मध्यमगति के तेज गेंदबाज
भूमिका ः मध्यक्रम बल्लेबाज
टेस्ट कैरियर का आगाज ः  वेस्टइंडीज, किंग्‍स्टन (जून, 2011)
वनडे कैरियर का आगाज ः श्रीलंका, दांबुला (अगस्त, 2008)
‌टी 20 कैरियर का आगाज ः जिम्बाब्वे, हरारे (जून, 2010)
अन्य टीमें ः दिल्ली, इंडिया रेड, अंडर 19, रायल चैलेंजर्स बंगलोर     
कप्तान ः भारतीय टेस्ट टीम, रॉयल चैलेंजर्स बंगलोर

टेस्ट में कोहली
स्‍थान     मैच    रन    औसत    शतक    अर्धशकत    सवोऱ्च्च
भारत    17     1059     46.04     3     7     107
विदेश     24     1935     43.00     8     5     169

वनडे
स्‍थान     मैच    रन    औसत    शतक    पचास    सवोऱ्च्च
भारत    63     2844     54.69     10     16     139*
विदेश     72     2885     47.29     11     13     136
अन्य देश    36     1483     54.92     4     7     183

2010 में सबसे ज्यादा वनडे रन बनाने वाले भारतीय क्रिकेटर
2011 में दुनिया के सबसे ज्यादा वनडे रन बनाने वाले क्रिकेटर
2012 में सबसे ज्यादा वनडे रन बनाने वाले भारतीय क्रिकेटर
2013 में सबसे ज्यादा वनडे रन बनाने वाले भारतीय क्रिकेटर
2014 में सबसे ज्यादा वनडे रन बनाने वाले भारतीय क्रिकेटर
 2012 में सबसे ज्यादा टेस्ट  रन बनाने वाले भारतीय क्रिकेटर 

वनडे में सबसे तेज 1000 रन बनाने वाले पहले भारतीय
वनडे में सबसे तेज 4000 रन बनाने वाले पहले भारतीय, विश्व के तीसरे
वनडे में सबसे तेज 5000 रन बनाने वाले पहले भारतीय, विश्व के दूसरे
वनडे में सबसे तेज 6000 रन बनाने वाले पहले भारतीय, विश्व के दूसरे
वनडे में सबसे तेज 7000 रन बनाने वाले वैश्विक खिलाड़ी
वनडे में सबसे तेज 10 शतक लगाने वाले पहले भारतीय, विश्व के दूसरे
वनडे में सबसे तेज 15 शतक लगाने वाले पहले भारतीय, विश्व के दूसरे
वनडे में सबसे तेज 20 शतक लगाने वाले पहले भारतीय, विश्व के दूसरे
वनडे में सबसे तेज 25 शतक लगाने वाले विश्व के पहले क्रिकेटर
टेस्ट में सबसे तेज 1000 रन बनाने वाले विश्व के पहले क्रिकेटर
वनडे में सबसे तेज 52 गेंदों में शतक लगाने वाले भारतीय क्रिकेटर
विश्व कप के पहले ही मैच में शतक जमाने वाले पहले भारतीय
- दुनिया के इकलौते कप्तान हैं, जिन्होंने टेस्ट में कप्तानी करते हुए अपनी पहली तीन पारियों में ही शतक ठोंके हैं

21 बार वनडे में मैन ऑफ द मैच चुने गए हैं कोहली
03 बार वनडे में मैन ऑफ द सीरीज चुने गए हैं
02 बार टेस्ट में मैन ऑफ द मैच चुने गए हैं कोहली
08 बार टी 20 में मैन ऑफ द मैच चुने गए हैं
03 बार टी 20 में मैन ऑफ द सीरीज चुने गए हैं

पुरस्कार
2012 में आईसीसी वनडे क्रिकेट ऑफ द ईयर चुने गए
2011-12, 2014-15 में बीसीसीआई पॉली उमर अवार्ड हासिल किया
2013 में अर्जुन अवार्ड से सम्मानित
2011-12, 2019-14 में सिएट इंटरनेशनल क्रिकेटर ऑफ द ईयर
2012  और  2014 में आईसीसी वर्ल्ड इलेवन टीम में शामिल     

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विराट

टैटू गुदवाने के शौकीन हैं विराट
कोहली को टैटू गुदवाने का बेहद शौक है। वह अब तक चार टैटू अपने शरीर पर गुदवा चुके हैं। उनका पसंदीदा टैटू गोल्डन ड्रैगन है जो उन्होंने अपनी बांह पर गुदवा रखा है। कोहली के मुताबिक यह टैटू अच्छे लक का रास्ता है। कोहली अपने फैशन सेंस के लिए भी जाने जाते हैं। उनका नाम 10 बेहतरीन कपड़े पहनने वाले आदमियों में शामिल हैं। इस सूची में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा का नाम भी शामिल हैं। अभी वह एक दर्जन से भी ज्यादा ब्रांड के लिए प्रचार करते हैं। विराट उस खास क्लब में भी शामिल हैं जिसमें 100 करोड़ रुपये से ज्यादा के ब्रांड का प्रचार करने वाले खिलाड़ी शामिल होते हैं।  कोहली लड़कियों में खासे लोकप्रिय हैं। उन्हें कई लड़कियां खून से खत लिख चुकी हैं। यह कोहली के प्रति दीवानगी को बयां करने के लिए काफी है। कोहली चैरिटी में भी काफी आगे हैं। वह अपने नाम से गरीब बच्चों के लिए एक संस्था चलाते हैं। इस संस्था का नाम विराट कोहली फाउंडेशन है।  कोहली केवल क्रिकेट को लेकर पैशनेट नहीं हैं बल्कि वह फुटबॉल को भी काफी पसंद करते हैं। कोहली देश में फुटबॉल को बढ़ावा देने वाली इंडियन सुपर लीग की टीम एफसी गोवा के सह मालिक भी हैं। कोहली पुर्तगाल और स्पेनिश क्लब रियाल मैड्रिड के स्टार स्ट्राइकर रोनाल्डो के बहुत बड़े प्रशंसक है।

नेहरा का कोहली कनेक्शन
कहते हैं समय बदलते देर नहीं लगती। कुछ ऐसा ही विराट कोहली के साथ हुआ। एक समय था जब स्कूली स्तर पर शानदार प्रदर्शन करने के लिए भारतीय टीम के स्टार गेंदबाज आशीष नेहरा ने उन्हें पुरस्कृत किया था। नेहरा तब तक स्टार बन चुके थे और विराट लाइन में थे। एक वह समय भी आया जब विराट कोहली की कप्तानी में आशीष नेहरा चैलेंजर सीरीज 2013 में खेले। कोहली, नेहरा से लगभग10 साल छोटे हैं। आशीष नेहरा और विराट कोहली एक साथ रणजी ट्रॉफी में दिल्ली की ओर से भी खेले।



विराट और विवाद

ऑस्ट्रेलिया के मैदान पर दिखाई उंगली: ऑस्ट्रेलियाई टीम को स्लेजिंग के लिए जाना जाता है और वह उनके खेल का हिस्सा भी है। ऑस्ट्रेलिया टीम के अलावा वहां के दर्शक भी कई बार मैदान पर खड़े विपक्षी टीम के खिलाडियों के साथ अभद्र मजाक करते हैं। लेकिन  कोहली भी अग्रेशन के मामले में कहीं से पीछे नहीं है। इसके चलते 2012 में उन्होंने सिडनी क्रिकेट ग्राउंड पर खेले जा रहे टेस्ट मैच के दौरान मैदान पर अपनी मिडिल फिंगर उठा दी थी। इसके अलावा मैदान पर वह जेम्स फॉक्नर को भी लताड़ लगा चुके हैं।

गंभीर-कोहली की लड़ाई: विराट कोहली हमेशा से ही अपने गुस्से और ज्यादा आक्रामक्ता के चलते फील्ड पर हाइपर हो जाते हैं। 2013 में खेले गए आईपीएल के छठे संस्करण के दौरान आरसीबी और केकेआर के बीच खेले गए मैच में विराट कोहली टीम इंडिया के ही खिलाड़ी गौतम गंभीर से भिड़ गए थे। दो छक्के लगाने के बाद कोहली आउट हो गए थे, जिसके चलते वे इतने गुस्से में आ गए कि, विकेट लेने की खुशी में जश्न मना रहे केकेआर के कप्तान गौतम गंभीर से उलझ पड़े। कोहली की इस हरकत के चलते उनकी कड़ी अलोचनाएं भी हुईं।

अंपायर से उलझ गए : अभी तक मैदान पर दर्शकों और खिलाडियों से भिड़ने वाले विराट कोहली को 2013 में जिम्बाब्‍वे के दौरे पर धोनी की अनुपस्थिती टीम की कमान सौंपी गई थी। मैच में सारी चीजें टीम इंडिया के हक में थीं, लेकिन तभी कोहली ने एक बार फिर नया विवाद खड़ा करने की ठान ली। कोहली कैच आउट हो गए, लेकिन वे अंपायर के फैसले से सहमत नहीं थे, इसके चलते उन्होंने रिव्यू लिया, लेकिन रिव्यू में भी उन्हें आउट ही करार दिया गया। जिसके बाद कोहली दोनों अंपायरों से भिड़ गए।

धवन-कोहली विवाद: 2014 के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर गई टीम इंडिया पूरी सीरीज में एक जीत हासिल करने के लिए तरस गई। ऎसे में माहौल ना सिर्फ मैदान पर खराब दिखा बल्कि टीम के ड्रेसिंग रूम में भी खिलाड़ी एक दूसरे के खिलाफ खड़े नजर आए। ब्रिस्बेन में खेले जा रहे टेस्ट मैच में शिखर धवन को मैच के चौथे दिन पारी की शुरूआत करनी थी, लेकिन प्रेक्टिस सेशन के दौरान चोट लग जाने के कारण वो पारी की शुरूआत करने नहीं जा सके। जिसके चलते विराट को नई गेंद का सामना करने जाना पड़ा और वे जल्द आउट होकर पवैलियन लौट आए। सूत्रों के मुताबिक इसको लेकर कोहली ने धवन पर आरोप लगाया था कि उनकी इंजरी फर्जी है। जिसके जवाब में शिखर धवन ने कहा था कि, मुझे अपने देश के लिए खेलने पर गर्व है। अगर मेरा प्रदर्शन अच्छा नहीं रहता है, तो मैं खुद बाहर बैठने को तैयार हूं। लेकिन कभी फर्जी इंजरी का बहाना नहीं करूंगा।


कोहली-पत्रकार विवाद: विराट कोहली ने वर्ल्ड कप 2015 में वेस्ट इंडीज के खिलाफ खेले जाने वाले मैच से पहले प्रेक्टिस सेशन से लौटते वक्त अपना आपा खो दिया था और एक पत्रकार के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया था। अचानक भड़के कोहली को देखकर पत्रकार शॉक्ड रह गया था। उसे अपनी गलती समझ में नहीं आ रही थी। पता चला कि किसी पत्रकार ने पहले विराट और उनकी गर्लफ्रेंड अनुष्का को लेकर कोई खबर लिखी थी जिसको लेकर विराट कोहली नाराज थे। लेकिन जब विराट को पता चला कि उनसे पत्रकार को पहचनाने में भूल हुई हैं तो उन्होंने उस पत्रकार से माफी भी मांग ली थी।




 

Sunday, 21 February 2016

चलो नकाब तो उतरा...


विलंब के लिए खेद है लेकिन अब जब समय मिला है तो मैं अपने अंदर की चिंगारी को भी एक लिखित रूप दे रहा हूं। पिछले कुछ समय से जेएनयू में देश विरोधी नारे को लेकर जो कुछ कहा जा रहा है और जो कुछ गढ़ा जा रहा है उसने बेहद हैरान हूं। दरअसल, इस घटना ने पहली बार दुनिया के सबसे मजबूत और बड़े लोकतंत्र को विखंडित कर दिया है। संभवतः पहली बार ऐसा हुआ है जब बुद्घजििवी वर्ग के हर सूरमें अपनी अपनी राग अलाप रह‌े हैं।  यह सच है कि सबको अपने अपने पूर्वाग्रह निष्पक्ष लगते हैं लेकिन सवाल है कि क्या निष्पक्षता की आड़ में हम अपनी विचारधारा तो नहीं थोप रहे हैं क्योंकि पहली बार ऐसा हुआ ह‌ै जब दोषियों को सजा दिलाने वाले न्याय के मंदिर में याचक को जाने से पहले सीढ़ियों पर ही इंसाफ कर रहे हैं तो पत्रकारिता के मुखर आवाज बन चुके पत्रकार जेएनयू मुद्दे के जरिए अपनी विचारधारा की व्याख्या करने में लगे हैं। चाहें पक्ष कोई भी हो सभी के अपने तर्क हैं और उस कमजोर तर्क में भी दर्शकों और पाठकों को दम लगता है। सही और गलत का पहचान दिलाने वाले शिक्षक या प्रोफेसर भी बुद्घिजीविता में अपना बौद्घिक ज्ञान दे रहे हैं। शिक्षा के मंदिर को तमाशा बनाने की कोशिश हो रही है। शिक्षक पाठ्यक्रम से न मतलब रखकर छात्रों को अपने वैचारिक रंग में रंगने में लगे हैं। यह वैचारिक रंग उस दिमाग में गाढ़ी हो जाती है जहां पहले ही खोखलापन है। तो ऐसे में अब क्यों न यह मान लिया जाए कि जेएनयू प्रकरण के बाद पहली बार समाज का हर वर्ग विखंडित है और हर विखंडन में अब तक की छुपी हुई उसकी सच्चाई बाहर आ गई है। मैं यह कभी नहीं कहता कि किसी की कोई विचारधारा नहीं होनी चाहिए। विचारधारा तो सबके होते हैं और होने भी जरूरी हैं। बिना विचारधारा के व्यक्ति का वजूद भी कठघरे में रहता है। लेकिन इन सब के बीच हमें यह तय करना होगा कि जब हम किसी बौद्घिक वर्ग में शामिल हो जाते हैं या यूं कहें की कर दिए जाते हैं तो क्या उस विचारधारा को थोपने की आजादी मिल जाती है? सवाल यह नहीं है कि कौन किसका समर्थक या भक्त है। सवाल यह है कि क्या वकील, प्रोफेसर, पत्रकार भी अब राजनेताओं की श्रेणी में आने लगे हैं। क्या अब तक मजबूत लोकतंत्र का दंभ भरने वाला यह देश त्रासदी की ओर जा रहा है। हम क्यों नहीं अपनी जिम्मेदारी को निष्पक्ष ढंग से अपनाने की कोशिश करते हैं। क्या हम टीवी स्क्रीन को 'ब्लैक' कर के क्रांति की मशाल के लिए चिंगारी पैदा कर सकते हैं? अगर हमने 'ब्लैक फ्राइडे' की शुरुआत कर दी है तो सिर्फ उसके लिए एक ही मुद्दा क्यों अहम हो जाता है? और अगर आप एक ब्लैक फ्राइडे की बजाए 'ब्लैक डे' नहीं मना सकते हैं तो यहीं से सवाल खड़े हो जाते हैं। बहरहाल, इस भीड़ और शोर में बात तो दब ही गई है। आखिर हम भटक क्यों रहे हैं? क्या अब भी कोई आगे आकर यह नहीं बोलेगा कि जेएनयू में जो हुआ वह गलत था। कन्हैया की गिरफ्तारी को हम इसलिए गलत क्यों कहेंगे कि उसने देशविरोधी नारे नहीं लगाए। क्या बतौर अध्यक्ष कन्हैया की जिम्मेदारियां नहीं होती हैं? क्या उसको कल्चरल प्रोग्राम के नाम पर देशद्रोही आवाजों की पहचान नहीं थी? अगर नहीं थी तो ऐसे अध्यक्ष की नाकामी को यह दर्शाता है। जो भी हो इस कन्फ्यूजन भरे माहौल में अब तय आपको करना है कि कौन सही है और कौन गलत ? हो सकता है आपकी विचारधारा और मीडिया का दबाव आप पर हावी होने की कोशिश करे लेकिन इन सबसे बचने के लिए एक डिस्प्रीन की गोली खा लीजिए और उठाईए इस माहौल में नाटक करने वाले नौटंकियों का लुत्फ.....   दीपक कुमार  deepak841226@gmail.com

Monday, 15 February 2016

मोहब्बत का ये कैसा दस्तूर- पहले कहा प्यार है फिर कहा बलात्कार है

गया वो जमाना जब फिल्मों में किसिंग सीन दिखाने के लिए फूलों का सहारा लिया जाता था, अब शुद्घ देसी रोमांस का दौरा है। नई पीढ़ी व्यावहारिक हो चली है। प्रेम और सेक्स दो अलग - अलग चीजें नहीं हैं। हम स्वीकारें या न स्वीकारें यही इस दौर की सच्चाई है । लेकिन एक - दो साल या इससे ज्यादा भी किसी रिश्ते में रहने के बाद लड़की अचानक बलात्कार का आरोप लगाए तो सवाल खड़े होते ही हैं। कानूनी और सामाजिक दोनों पहलुओं से प्रेम का यह नया चलन विचार की मांग कर रहा है। खासकर आज वेलेंटाइन डे के मौके पर इसकी प्रासंगिकता कहीं ज्यादा हो जाती है।      




साल 2014 के सितंबर का महीना था। भारतीय हॉकी टीम एशिया कप में गोल्ड मेडल जीतकर स्वेदश लौटी थी। दिल्ली के इंदिरा गांधी एयरपोर्ट पर टीम का भव्य स्वागत हुआ। इसी दौरान गले में मेडल पहने कप्तान सरदार सिंह संग एयरपोर्ट पर एक अनजान सी लड़की मुस्कुराते हुए दिखी। संभवतः देश ने इसी दिन पहली बार उस लड़की को सरदार सिंह की प्रेमिका और मंगेतर के रूप में देखा। इस रिश्ते को इन दोनों की समय - समय पर आई रोमांटिक तस्वीरों और सरदार के बयानों से मुहर लगी लेकिन पिछले कुछ समय से हम मीडिया में उन खुशनुमा तस्वीरों के साथ ही इस प्रकरण का कड़वा क्लाइमेक्स भी देख रहे हैं।  दरअसल, सरदार पर उसी लड़की ने बलात्कार से लेकर जबरन गर्भपात कराने तक के आरोप लगा दिए हैं। अब सरदार लगातार सफाई देने में जुट गए हैं कि वह मंगेतर नहीं दोस्त है। बहरहाल, सच क्या है यह जांच का विषय है लेकिन क्या इसे बलात्कार की संज्ञा दी जा सकती है? क्या लगभग तीन साल तक बतौर प्रेमी- प्रेमिका एक साथ रहने के बाद कोई प्रेमी अपनी प्रेमिका का बलात्कार कर सकता है? सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक अगर दो वयस्क व्यक्ति आपसी रजामंदी से शादी के बगैर साथ रहते हैं और संबंध बनाते हैं तो इसमें कुछ गलत नहीं है। यह अपराध नहीं है। साथ रहना जीवन का अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के अनुसार, देश में ऐसा कोई कानून नहीं है जो शादी से पहले सेक्स संबंध की मनाही करता हो। कोर्ट के मुताबिक अगर बिना शादी किए कोई जोड़ा एक साथ पति-पत्नी की तरह रहा है तो दोनों कानूनी रूप से शादीशुदा माने जाएंगे। लेकिन पिछले कुछ सालों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिससे कोर्ट भी परेशान है। वैसे तो दो लोगों के बीच के प्रेम प्रसंग में निश्चित रूप से कोर्ट की दिलचस्पी नहीं रही है लेकिन न्यायाधीश ऐसे मामलों में असमंजस में रहते हैं। 27 जून, 2014 को सुप्रीम कोर्ट के दो न्यायाधीशों, न्यायमूर्ति विक्रमजीत सेन और एस.के. सिंह ने एक सुनवाई के दौरान कहा था, ' इट इज नॉट क्यूपिड बट स्टुपिड' यानी यह प्रेम नहीं बेवकूफी है। न्यायाधीश ऐसे केस की सुनवाई कर रहे थे जिसमें एक पूर्व एअर होस्टेस और एक बैंकर तीन साल तक प्रेम और लिव इन रिलेशन में रहने के बाद अदालत में बलात्कारी और बलात्कार पीड़ित के रूप में आमने-सामने थे। लड़की का कहना था कि शादी के वादे के बिना वह यौन संबंध कभी नहीं बनाती। वहीं बैंकर का जवाब था कि लड़की अच्छी तरह से जानती थी कि मैं पहले से शादीशुदा हूं। न्यायाधीशों ने उन दोनों को एक-दूसरे की अश्लील तस्वीरें खींचकर अदालत में दिखाने के लिए फटकार लगाई। कोर्ट की टिप्प्णी थी कि आगे ऐसे और भी मामले हमारे सामने आ सकते हैं। ऐसे कई मामले सामने आए भी। इसी में एक मामला बॉलीवुड अभिनेत्री प्रिटी जिंटा से भी जुड़ा। पिछले साल आईपीएल टीम किंग्स इलेवन पंजाब की को-ओनर प्रीति जिंटा ने टीम के अन्य को-ओनर नेस वाडिया पर उनसे बदसलूकी और गलत व्यवहार का आरोप लगाया। इस बारे में बकायदा पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराई गई। यहां यह बताना जरूरी है कि नेस और ‌प्रिटी के बीच करीब दस साल से एक 'खास' रिश्ता था। इस रिश्ते को लेकर दोनों बेहद गंभीर भी थे लेकिन फिर ऐसा क्या हुआ कि वाडिया कानून की नजर में 'छिछोरे' बन गए।  तो यहीं से यह सवाल मौजूं हो जाता है कि क्या इस दौर में प्यार की परिभाषा बदल गई है या फिर इसका नाम "अहंकार', "बदले की भावना', "ब्लैकमेलिंग' और 'पैसे वाला लव' हो चला है।  कुछ साल पहले की ही बात है दिल्ली में नौकरी मिलने के बाद साथ काम करने वाले एक लड़के और लड़की ने साथ रहने का फैसला किया। लगभग तीन साल तक साथ रहने के बाद लड़का अचानक गायब हो गया और उसने अपना फोन भी स्विच ऑफ कर लिया। लड़की ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई कि न केवल लड़के ने शादी का वादा करके उससे साथ शारीरिक संबंध बनाए बल्कि पैसे भी उधार लिए। उसने पुलिस में इस बात की भी शिकायत की कि लड़के की बहन और उसकी मां ने भी फ्लैट में आकर उसके साथ मारपीट की। रिपोर्ट के आधार पर लड़का, उसकी मां और बहन को गिरफ्तार कर लिया गया। जब मामला कोर्ट में पहुंचा तो लड़की पुलिस में की गई शिकायत के अनुसार बयान देने के लिए सामने नहीं आई और न ही उसने अपने साथ बने शारीरिक संबंध या मारपीट के बारे में सबूत पेश किए। कोर्ट ने लड़की की रिपोर्ट को प्रेमी को वापस पाने और मोटी रकम लेने की एक कोशिश भर करार दिया और सभी को बरी कर दिया। इस दौरान कोर्ट ने पुलिस को भी कड़ी फटकार भी लगाई। ऐसा ही एक प्रकरण साल 2003 में आया था। जब लिव इन में रह रही एक युवती ने शादी का झांसा देकर करीब छह साल पुराने प्रेमी पर शारीरिक संबंध बनाने का आरोप लगाया। शीर्ष अदालत ने शख्स को बरी कर दिया क्योंकि अदालत का मानना था कि 'जब दो लोग प्रेम और रोमांस में डूबे हों तो शादी का वादा बहुत मायने नहीं रखता।' दरअसल, वर्तमान में प्यार भी भोग विलास की चीज हो चली है। वर्तमान में युवा लगातार प्यार की परिभाषा को अपने हिसाब से गढ़ रहे हैं। तभी तो प्यार के दिन के लिए जिस वेलेंटाइन डे को जाना जाता था वह अब प्यार से ज्यादा महंगे गिफ्ट्स के आदान प्रदान के लिए जाना जाने लगा है यानी की रिश्तों में प्यार से ज्यादा दिखावट और मार्केट ने अपनी जगह बना ली है। अब प्रेमिकाओं को प्रेमी का सिर्फ साथ नहीं बल्कि साथ के साथ साथ महंगे रेस्तरां में लंच और महंगे गिफ्ट्स चाहिए होते हैं वही दूसरी और प्रेमी को प्रेमिका की प्यार भरी बातें ही नहीं बल्कि बातों के साथ कुछ खास लम्हें भी चाहिए।  अब तो एक साल भी आपके प्यार की कहानी चल जाए तो वह किसी अजूबे से कम नहीं होगा। जहां पहले प्यार में टूटे दिल से कविता और शायरी निकलती थी वहीं अब प्यार में धोखा खाया दिल में बदले की भावना के बीज उपजते हैं और आए दिन हमें प्रेमी-प्रेमिका से जुड़ी घटनाओं वाले अपराधिक समाचार सुनने को मिलते हैं।  बहरहाल, प्यार में पवित्रता बरकरार रखना कोर्ट का काम नहीं है बल्कि उन  प्रेमी जोड़ाां का ही काम है जो जुड़ने से पहले जांच परख करने से कतराते हैं।      


बॉलीवुड में नहीं होता बलात्कार
लिव - इन रिलेशनशिप में रहकर आसानी से बच निकलने में बॉलीवुड माहिर है। यहां न तो 'बलात्कार' और न ही 'शादी का झांसा' देने जैसे मामले आते हैं। बॉलीवुड में लिव इन रिलेशनशिप की बात हो तो सबसे पहले नाम कैटरीना कैफ और रणबीर कपूर का सामने आता है। रणबीर और कैट की जोड़ी लंबे समय तक लिव इन में रही। हाल ही में दोनों अलग हुए है।  अब बात जॉन अब्राहम और बिपाशा बसु की करते हैं। ये दोनों लंबे समय से साथ-साथ रह रहे हैं। जॉन-बिपाशा ने कभी भी अपने रिलेशनशिप को छुपाया भी नहीं लेकिन जब अलग होने जैसे हालात बने तो दोनों ह‌ी चुपके से निकल लिए। बॉलीवुड के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना भी टीना मुनीम संग लिव इन में रहे । राजेश खन्ना के अनीता आडवाणी संग भी लिव इन में रहने की खबरें आती रहीं। जीनत अमान और संजय खान भी एक दूसरे को परखने के लिए कुछ दिन लिव इन में रहे लेकिन मौका मिलते भी अलग भी हो लिए। लिव इन में रहने वालों में नीना गुप्ता का भी नाम आता है। वह वेस्टइंडीज के क्रिकेटर विव रिचडर्स के साथ रिलेशन में रहीं। वहीं क्रिकेटर विराट कोहली और अनुष्का शर्मा भी लिव इन में रहने की तैयारी में थे लेकिन अफसोस उससे पहले ही दोनों का ब्रेकअप हो गया। संजय दत्त शादी से पहले अपनी पत्नी मान्यता दत्त के साथ लिव इन में ही रहते थे। अर्चना पूरन सिंह और परमीत सेठी शादी से पहले कई साल तक एक दूसरे के साथ एक ही घर में रहते थे। अपने बोल्ड स्टेटमेंट्स और बिंदास लाइफस्टाइल के लिए पूर्व मिस यूनिवर्स सुष्मिता सेन भी कम मशहूर नहीं हैं। पहले तो एक बच्ची को गोद लेकर और अब अपने बॉयफ्रेंड रणदीप हुड्डा को लेकर। लेकिन इनका लिव इन ज्यादा दिन नहीं टिका और दोनों अलग हो गए। एक औरर ब्यूटीक्वीन और अभिनेत्री लारा दत्ता भी खुल्लम खुल्ला प्यार करने में यकीन रखती हैं। लारा का अपने बॉयफ्रेंड केली डॉर्जी के साथ कुछ ऐसा ही रिश्ता रहा ये अलग बात है कि वो भी अब साथ नहीं हैं। सत्या के भिखू म्हात्रे  मनोज वाजपेयी और उनकी बीबी नेहा ने भी शादी से पहले कई साल साथ रहकर एक दूसरे को जांचा परखा। करीना कपूर और सैफ अली खान भी लिव इन को शादी के अंजाम तक पहुंचाने में कामयाब रहे। 


टीवी स्टारों का लिव-इन रिलेशनशिप
फिल्मों में तो लिव इव रिलेशन्स की भरमार है लेकिन टीवी भी कही पीछे नहीं है। सबसे पहले बात टीवी क्वीन राखी सावंत की। अपने पुराने प्रेमी अभिषेक के साथ वो एक अरसे तक लिव इन रहीं। दोनों साथ रहते थे और उन्होंने इसका एलान भी कर रखा था। इसके बाद तो टीवी के एक रियालिटी शो में पांच जोड़ियां लिव इन रिलेशनशिप के तहत तीन महीने साथ थे। शादी के इरादे से यहां भी आईं राखी सावंत ने अपने मंगेतर इलेश परुजनवाला को छोड़ दिया उन्हें ये रिश्ता पसंद नहीं आया यानी दोबारा उनका लिव इन फेल हो गया। लेकिन इसी सीरियल की एक और जोड़ी गुरमीत-देबिना ने शादी करने का फैसला कर लिया। अपने छह साल पुराने रिश्ते को आखिरकार गुरमीत-देबिना ने मंजिल तक पहुंचाने का फैसला कर लिया है। ये जोड़ी रामायण और पति-पत्नी और वो में एक साथ नजर आ चुके हैं। वैसे टीवी की एक और हिट जोड़ी कश्मीरा शाह और कृष्णा भी अरसे से एक दूसरे के साथ रह रहे हैं। ऐसे ही कई नाम लिव इन रिलेशनशिप के लिए जाने-जाने जाते हैं।



यह है रेप की परिभाषा
भारतीय दंड संहित की धारा-375 में रेप को परिभाषित किया गया है। अगर किसी महिला के साथ कोई पुरुष जबरन शारीरिक संबंध बनाता है तो वह रेप होगा। महिला के साथ किया गया यौनाचार या दुराचार दोनों ही रेप के दायरे में होगा। महिला के शरीर के किसी भी हिस्से में अगर पुरुष अपना प्राइवेट पार्ट डालता है तो वह भी रेप के दायरे में होगा।  महिला के प्राइवेट पार्ट में अगर पुरुष अपने शरीर का कोई भी हिस्सा या कोई भी ऑब्जेक्ट डालता है तो वह भी रेप ही माना जाएगा। महिला के साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाने के लिए उसके कपड़े उतारना या बिना उतारे ही उसे संबंध बनाने के लिए पोजिशन में लाया जाता तो वह भी रेप के दायरे में होगा। 

नाबालिग की 'सहमति' भी सहमति नहीं
नाबालिग लड़की की सहमति को सहमति नहीं माना जाएगा।  अगर कोई शख्स किसी महिला को डरा कर सहमति ली हो या उसके किसी नजदीकी को जान की धमकी देकर सहमति ली गई हो तो भी वह सहमति नहीं मानी जाएगी और ऐसा संबंध रेप होगा।  महिला ने अगर यह समझते हुए सहमति दी है कि आरोपी उसका पति है या भविष्य में उसका पति बन जाएगा, जबकि आरोपी उसका पति नहीं है तो भी ऐसी सहमति से बनाया गया संबंध रेप होगा। यानी समाज के सामने शादी करने का वादा, घर या मंदिर में चुपचाप मांग में सिंदूर भर देना या वरमाला पहनाकर खुद को पति बताने का झांसा दे कर बनाया गया संबंध भी रेप के दायरे में होगा। जब महिला की सहमति ली गई, उस वक्त उसकी दिमागी हालात ठीक नहीं हो या फिर उसे बेहोश करके या नशे की हालत में सहमति ली गई हो या फिर उस हालत में संबंध बनाए गए हों तो वह सहमति भी सहमति नहीं मानी जाएगी।

उम्र का अहम रोल
रेप के केस में पीड़िता की उम्र को साबित करना केस को किसी भी मुकाम पर पहुंचाने के लिए बहुत जरूरी है।  10वीं के शैक्षणिक दस्तावेज में लिखी उम्र सबसे बड़ा सबूत है। अगर 10वीं का सर्टिफिकेट मौजूद नहीं है तो पढ़ाई की शुरुआत के वक्त स्कूल आदि में लिखाई गई उसकी उम्र का सर्टिफिकेट।  वह भी न हो तो कॉर्पोरेशन व पंचायत आदि का सर्टिफिकेट मान्य होता है। इन तीनों के न होने पर बोन एज टेस्ट कराया जाता है। बोन एज टेस्ट से किसी लड़की की उम्र को सटीक नहीं आंका जा सकता। अगर लड़की की उम्र 16 साल बताई गई हो तब बोन एज टेस्ट से उसकी उम्र 14 से लेकर 18 साल तक आंकी जा सकती है। ऐसे में लड़की की उम्र को 18 साल माना जाता है और उसे बालिग करार दिया जा सकता है।  कानून के मुताबिक जो लड़की बालिग है, वह शारीरिक संबंध बनाने के लिए सहमति दे सकती है और तब वह रेप नहीं माना जाएगा।

लड़की का बयान ही काफी
रेप और छेड़छाड़ के मामले में लड़की का बयान अहम सबूत है। अगर बयान पुख्ता है और उसमें कोई विरोधाभास नहीं है तो किसी दूसरे अहम सबूत की जरूरत नहीं है। ऐसे मामले में शिकायत के बाद पुलिस को अधिकार है कि वह आरोपी को गिरफ्तार कर ले।  चाहे मामला रेप का हो या फिर छेड़छाड़ या सेक्शुअल असॉल्ट (महिला के शरीर के खास अंगों को छूना या छूने की कोशिश करना) का, दोनों ही सूरत में अपराध साबित करने का भार शिकायती पक्ष पर ही होता है।  मामला रेप का हो छेड़छाड़ या सेक्शुअल असॉल्ट का, ये तमाम मामले महिलाओं के खिलाफ किए गए अपराध हैं और ऐसे मामले संज्ञेय अपराध (जिसमें गिरफ्तार किया जा सके) के दायरे में आते हैं।  संज्ञेय अपराध का मतलब है कि अगर पुलिस को इन अपराध के होने की कहीं से भी जानकारी मिले तो वह ऐसे मामले में एफआईआर दर्ज कर सकती है। शिकायती अगर सीधे थाने में शिकायत करे तो पुलिस इस शिकायत के आधार पर केस दर्ज कर सकती है। आरोपी को ट्रायल के दौरान अपने बचाव का मौका दिया जाता है। इस दौरान वह अपने को बेगुनाह साबित करने के लिए गवाह और सबूत पेश कर सकता है।


फ्लैट सिस्टम से मिला बढ़ावा
‘लिव-इन’रिलेशनशिप का आधार खुलापन है। मेट्रो शहरों की फ्लैट व्यवस्था ने इस तरह के लाइफ स्टाइल को बढ़ावा दिया और यह सुविधा भी दी कि साथ रहने के लिए बस आपसी सहमति चाहिए। यह भी एक कारण है कि लिव इन में धोखाधड़ी के सिर्फ मुकदमे ही दर्ज नहीं होते, बल्कि हर मेट्रो और बड़े शहरों में इसकी शिकायतें आम होती जा रही हैं। कुछ समय पहले ऑरमैक्स मीडिया नामक संस्था ने भारत के 40 शहरों में 5000 युवाओं को लेकर एक अध्ययन किया। जिसमें 72 फीसदी युवाओं का मानना था कि लिव-इन-रिलेशन असफल रहते हैं। हालांकि विवाह की जटिलताओं से बचने के लिए अब लिव इन को अपनाया जा रहा है। नेशनल क्राइम ब्यूरो की रिपोर्ट के मुताबिक बेंगलुरू ही वह शहर है, जहां ‘लिव इन’ रिलेशनशिप में सर्वाधिक फ्रॉड के मामले सामने आए। देश में सबसे ज्यादा लिव-इन जोड़े बैंगलोर में ही रहते हैं।


'लिव इन' पर सुप्रीम कोर्ट के विचार
कुछ समय पहले एक अपील की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने लिव-इन-रिलेशनशिप पर जो टिप्पणी की उससे हमारे समाज में इस मसले पर चल रही बहस एक नए दौर में पहुंच गई है। कोर्ट ने कहा कि अगर दो वयस्क व्यक्ति आपसी रजामंदी से शादी के बगैर साथ रहते हैं तो इसमें कुछ गलत नहीं है। यह अपराध नहीं है। साथ रहना जीवन का अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के अनुसार, शादी के पहले सेक्स संबंध कायम करना कोई अपराध नहीं है। देश में ऐसा कोई कानून नहीं है जो शादी से पहले सेक्स संबंध की मनाही करता हो। इससे पहले जनवरी 2008 में भी कोर्ट ने लंबी अवधि के लिव-इन रिश्ते को शादी के बराबर मानने का फैसला दिया था। कोर्ट के मुताबिक अगर बिना शादी किए कोई जोड़ा एक साथ पति-पत्नी की तरह रहा है तो दोनों कानूनी रूप से शादीशुदा माने जाएंगे। कोर्ट ने कहा है कि इस दौरान अगर पुरुष साथी की मौत हो जाती है तो उसकी संपत्ति पर महिला साथी का कानूनन अधिकार होगा और वह उसकी वारिस मानी जाएगी। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एमवाई इकबाल और जस्टिस अमिताव रॉय की बेंच ने यह आदेश सुनाते हुए कहा कि लगातार शारीरिक संबंध बनाने वाले कपल  को विवाहित ही माना जाएगा। इस तरह के मामले में दूसरे पक्ष को यह साबित करना होगा कि वे (कपल) कानूनी रूप से शादीशुदा नहीं हैं।

एक प्यार ऐसा भी
वेलेंटाइन डे से पहले थाईलैंड में युवाओं को कंडोम के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए कैंपेन चल रहा है। ये पहला मौका होगा, जब इसे बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे पहले युवाओं को मंदिर जाने और डेट के बाद सीधे घर जाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता रहा है। थाईलैंड दुनिया के सर्वाधिक किशोरों की प्रेगनेंसी वाले देशों में एक है। यहां यौन संक्रमण के मामले भी बढ़ रहे हैं। इस नई मुहिम को 2019 तक चलाया जाएगा और इसका लक्ष्य युवाओं में बढ़ते गर्भधारण के मुद्दे पर चर्चा करना है। हाल के वर्षों में थाईलैंड के अधिकारी युवाओं को सेक्स से बचने और कंडोम के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित कर रहे हैं पर इस साल कंडोम के इस्तेमाल से जुड़े कलंक को कम करने की कोशिश की जा रही है।  थाईलैंड में एक हजार लड़कियों में से 50 लड़कियां 15 से 19 साल की उम्र में मां बन जाती हैं। यहां 10 से 19 साल के युवाओं में यौन संबंधी रोग पांच गुना तक बढ़ गए हैं। थाईलैंड में करीब चार लाख 50 हजार लोग एचआईवी पॉजिटिव हैं।

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इंटरव्यू
जहां एक तरफ लिव इन रिलेशन को लेकर तरह तरह की बातें हो रही हैं। वहीं लेखिका और विचारक शीबा असलम फाहमी का मानना है कि यहां भी पुरुषों का ही वर्चस्व चलता है। पेश है उनसे बातचीत के मुख्य अंश -

सवाल -  वर्तमान  में लिव इन स्वार्थ और धोखे का रिलेशनशिप है क्या ?
जवाब - बिल्कुल नहीं। अब भी प्यार करने वाले एक साथ लंबे समय से रिलेशन चला रह हैं। लेकिन आपको क्यों ऐसा लगता है कि इसमें स्वार्थ और धोखा हावी है।

दरअसल, यह सवाल हॉकी कप्तान सरदार सिंह के केस के बाद कहीं ज्यादा मौजूं हो चला है।
देखिए, किसी एक केस के बारे में कमेंट करना गलत होगा लेकिन अगर बेबुनियाद मुकदमें जब अदालत के सामने आते हैं तो धाराशायी भी होते हैं। हमारे देश की अदालतें अपने विवेक का इस्तेमाल कर दूध का दूध और पानी का पानी कर देती हैं। आंकड़े उठा कर देख लीजिए। ऐसे कई मामलों में लड़कियों को भी कोर्ट ने लताड़ लगाई है। लेकिन मेरा सिर्फ इतना कहना है कि यह कौन तय करेगा कि एक लड़की के साथ कब रेप हो सकता है और कब नहीं।

तो क्या अब रेप की नई परिभाषा लिखे जाने की जरूरत है ?
मेरा बस यह कहना है कि इस पर विचार हो।  लड़की भले ही शादी शुदा हो या फिर दस - पंद्रह साल से रिलेशनशिप में हो लेकिन उससे अपनी कुंठा शांत करने के लिए पुरुष जबरदस्ती यौन संबंध बनाता है तो उसे रेप की श्रेणी में रखे जाने की जरूरत है। यह स्‍त्री के खिलाफ है। हमारे यहां शादी के अंदर रेप का कोई मजबूत कानून भी नहीं है और न ही कोई महिला आगे आने की हिम्मत दिखाती है।  

तो आपके कहने का मतलब यह है कि लिव इन में भी लड़की से उसका पार्टनर रेप कर सकता है?
हां , क्यों नहीं। सच कहूं तो यह पूरी तरह से पुरुष समाज के लिए मस्ती करने का जरिया बन गया है। इसमें पुरुष को सिर्फ अधिकार हैं लेकिन कर्तव्य का पता नहीं। इस पुरुषवादी सोच को तोड़ने की जरूरत है। इसमें महिलाओं पर दबाव ज्यादा आता है। मसलन, अगर लिव इन में बच्चा होता है तो सारी जिम्मेदारी औरत ही उठाती है। बाद में बच्चे को भी समाज में जिल्लतें झेलनी पड़ती हैं।

लेकिन लड़की का अपना विवेक भी तो काम करता है।
बिल्कुल, उसका विवेक काम करता है  लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि अगर एक बार लड़की किसी के साथ कमिटेड हो गई तो उसकी गुलाम हो गई। मैं यह भी कहना चाहूंगी कि लड़कियों को भी समझ कर फैसले लेने की जरूरत है। 

लिव इन का ट्रेंड कैसे बढ़ा?
दरअसल, परिवारों की आंतरिक जकड़न की वजह से यह ट्रेंड बढ़ा है। अगर एक लड़का या लड़की प्यार करते हैं तो उसमें परिवार वाले जाति, धर्म और पता नहीं क्या , क्या तलाश लेते हैं। बच्चे जिंदगी के सारे फैसले ले सकते हैं तो शादी का फैसला परिवार को क्यों लेने दें ? परिवारों में विवाह को लेकर जो विवाद है उससे बचने के लिए बच्चे गांव शहर से दूर रह कर लिव इन में रहते हैं।  लिव इन उसी जकड़न का जवाब है। हमने डॉक्टर, इंजीनियर तो बना दिया लेकिन शादी का मामूली फैसला हम खुद करते हैं, जो यह गलत है।  साथ ही लिव इन में रह रहे पुरुषों की यह जिम्मेदारी है कि वह महिलाओं से सम्मानित व्यवहार करें।

तो लिव इन में महिलाएं उपभोक्ता की तरह इस्तेमाल हो रही हैं? 
शायद हां, लेकिन उसे आप उपभोक्ता की तरह नहीं इस्‍तेमाल कर सकते हैं। यह चीरहरण जैसा मामला है। अगर अभिनेत्री प्रीति जिंटा कई सालों के रिलेशनशिप में रहने के बाद नेस वाडिया पर केस करती हैं तो इसे हल्के में नहीं ले सकते हैं। संभवतः वाडिया ने उन्हें उपभोक्ता की तरह ही इस्तेमाल करने की कोशिश की। आप पत्नी, प्रेमिका, बहन या मां किसी के साथ भी ऐसा नहीं कर सकते । भले ही रिश्ते में बहुत गहराई  हो।  मसलन, इसका उदाहरण है ट्विंकल खन्ना और अक्षय कुमार । अक्षय ने उपभोक्ता की तरह अपनी पत्नी ट्विंकल से रैंप शो के दौरान पैंट की बटन खुलवाई। तब उन पर मुकदमा भी हुआ।